Defense Budget 2026: जब वैश्विक हालात अस्थिर हों और सीमाओं पर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हों, तब किसी भी देश के बजट से उसकी प्राथमिकताएं साफ झलकती हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र को लेकर ऐसा ही स्पष्ट संदेश दिया है। इस बार रक्षा बजट में बड़ा इजाफा कर यह संकेत दिया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। बढ़ते खतरों और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने डिफेंस सेक्टर पर खुलकर निवेश किया है।
रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
1 फरवरी 2026 को पेश हुए आम बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के मुकाबले काफी अधिक है। बजट में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि सरकार सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य ताकत को मजबूत करने को लेकर गंभीर है। विशेषज्ञ इसे रणनीतिक दृष्टि से अहम फैसला मान रहे हैं।
क्यों जरूरी हुआ खर्च बढ़ाना
बीते कुछ वर्षों में भारत को कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सीमाई तनाव, साइबर युद्ध, ड्रोन और आधुनिक तकनीक आधारित हथियारों ने सैन्य तैयारियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। तीनों सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा बजट बढ़ाना जरूरी माना गया।
यह भी देखेंःभारत से मैच नहीं खेलेगा Pakistan, पूर्व दिग्गज भड़के बोले बिना खेले खुद को ही होगा सबसे बड़ा नुकसान !
आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस
बजट में सबसे बड़ा जोर सेनाओं के आधुनिकीकरण पर दिया गया है। नए हथियार, उन्नत उपकरण और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए कैपिटल आउटले में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य सेना को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश
वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च की बात करें तो अमेरिका सबसे आगे है। उसका सैन्य बजट भारत से कई गुना ज्यादा है। हालांकि भारत का फोकस जरूरत के अनुसार संतुलित निवेश पर है, जिससे देश की सुरक्षा लंबे समय तक मजबूत बनी रहे।