होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से बंद होने से वैश्विक संकट गहराता जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण इस अहम रास्ते से जहाजों की आवाजाही रुक गई है। यही रास्ता दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का मुख्य मार्ग है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत उछाल देखा गया है, जिससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है।
यूरोप में गहराया ऊर्जा संकट
इस संकट का सबसे ज्यादा असर अब यूरोप में दिखाई दे रहा है। यूरोपियन कमीशन ने लोगों को घर से काम करने की सलाह दी है ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार यूरोप के पास केवल 6 हफ्ते का जेट फ्यूल बचा है। ऐसे में कई गैर-जरूरी उड़ानों को रद्द करने की स्थिति बन सकती है।
पहले से जूझ रहा था यूरोप
यूरोप पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा संकट का सामना कर रहा था। अब ईरान-अमेरिका तनाव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा और ज्यादा हो गया है। एशिया में भी इसका असर दिख रहा है, जहां कई देशों को तेल सप्लाई में दिक्कत हो रही है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
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तेल सप्लाई का बड़ा रास्ता बंद
होर्मुज जलडमरूमध्य से एशिया और यूरोप के लिए बड़ी मात्रा में तेल और ईंधन गुजरता है। एशियाई देशों को पिछले साल करीब 45 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से मिला था। वहीं यूरोप का लगभग 39 प्रतिशत जेट फ्यूल और किरोसीन इसी मार्ग से आता है। अफ्रीका भी इस रास्ते पर निर्भर है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से पूरी वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
तेल कीमतों में तेजी और असर
इस संकट का असर तेल कीमतों पर भी साफ दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 7 प्रतिशत बढ़कर 96.88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई भी 90 डॉलर के पार पहुंच गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर जा चुकी है। जानकारों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में ईंधन और महंगा हो सकता है और इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।