ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की LPG सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है। भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत LPG आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और समुद्री मार्गों पर खतरे की वजह से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसी कारण मार्च 2026 से भारत में LPG आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में सप्लाई का दबाव और बढ़ सकता है।
तेजी से घटा आयात
फरवरी 2026 तक भारत हर महीने करीब 20 लाख टन LPG आयात कर रहा था। लेकिन मार्च में यह घटकर 11 लाख टन रह गया और अप्रैल में यह और गिरकर केवल 9.5 लाख टन तक पहुंच गया। कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म Kpler के वेसल ट्रैकिंग डेटा में भी इस गिरावट की पुष्टि हुई है। इससे साफ है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता ने भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन को सीधे प्रभावित किया है। सरकार और तेल कंपनियां अब वैकल्पिक सप्लाई मार्गों पर भी विचार कर रही हैं ताकि घरेलू बाजार में ज्यादा संकट पैदा न हो।
क्यों अहम है हॉर्मुज
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का पेट्रोलियम और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। जंग शुरू होने से पहले यहां से रोजाना 130 से 140 जहाज गुजरते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इससे केवल LPG ही नहीं बल्कि क्रूड ऑयल और LNG सप्लाई पर भी असर पड़ा है। हालांकि सबसे ज्यादा दबाव LPG बाजार पर देखने को मिल रहा है क्योंकि भारत समेत कई देश घरेलू जरूरतों के लिए इस ईंधन पर काफी निर्भर हैं।
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घरेलू सप्लाई पर दबाव
भारत में 33 करोड़ से ज्यादा परिवार LPG कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सरकार अब घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने में जुटी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों के लिए LPG सप्लाई सीमित की जा रही है ताकि रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे। इसके साथ ही LPG रीफिल बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल भी बढ़ा दिया गया है ताकि मांग को नियंत्रित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज संकट लंबा खिंचता है तो गैस की कीमतों और सप्लाई दोनों पर दबाव और बढ़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। भारत वैकल्पिक आयात स्रोत तलाशने की कोशिश कर रहा है लेकिन इतनी बड़ी मांग को तुरंत पूरा करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले समय में LPG सप्लाई और कीमतों को लेकर लोगों की चिंता बनी रह सकती है।