भारतीय रेलवे अब अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी PRS को पूरी तरह बदलने जा रहा है। रेलवे का मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम साल 1986 में शुरू हुआ था और तब से इसमें केवल छोटे बदलाव किए जाते रहे। लेकिन अब बढ़ते ऑनलाइन ट्रैफिक और यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे ने इसे पूरी तरह अपग्रेड करने का फैसला लिया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को अगस्त से नए सिस्टम पर ट्रेनों को शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। रेलवे का दावा है कि नया सिस्टम यात्रियों को पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद सुविधा देगा।
AI करेगा बड़ा काम
नए स्मार्ट सिस्टम में AI आधारित प्रिडिक्शन फीचर जोड़ा गया है। यह फीचर पुराने टिकट बुकिंग डेटा और यात्रा ट्रेंड्स के आधार पर बताएगा कि वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार इस फीचर की सटीकता करीब 94 प्रतिशत तक हो सकती है। इससे यात्रियों को पहले ही अंदाजा लग जाएगा कि टिकट कन्फर्म होने की उम्मीद कितनी है। लंबे समय से लोग टिकट वेटिंग को लेकर परेशान रहते थे लेकिन अब AI तकनीक इस समस्या को काफी आसान बना सकती है।
बुकिंग होगी पांच गुना तेज
रेलवे के नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड मानी जा रही है। अभी मौजूदा सिस्टम करीब 25 हजार टिकट प्रति मिनट बुक कर पाता है लेकिन नया सिस्टम 1.25 लाख टिकट प्रति मिनट तक प्रोसेस कर सकेगा। इससे वेबसाइट स्लो होने और सर्वर डाउन जैसी दिक्कतें काफी कम हो जाएंगी। रेलवे का कहना है कि इससे दलालों और अवैध सॉफ्टवेयर पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। यात्रियों को पीक टाइम में भी आसानी से टिकट बुक करने का मौका मिलेगा।
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RailOne ऐप बना लोकप्रिय
भारतीय रेलवे का RailOne ऐप भी तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में शुरू हुए इस ऐप को अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। इस ऐप के जरिए टिकट बुकिंग के साथ शिकायत समाधान की सुविधा भी मिलती है। रेलवे अब इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाने की तैयारी में है ताकि यात्रियों को एक ही जगह सभी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
यात्रियों को बड़ी राहत
नए सिस्टम के तहत यात्री कन्फर्म टिकट को बिना कैंसिल किए अपनी यात्रा की तारीख भी बदल सकेंगे। इसके लिए किसी तरह की कैंसिलेशन फीस नहीं देनी होगी। वहीं तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा ताकि फर्जी बुकिंग और गड़बड़ी को रोका जा सके। रेलवे का मानना है कि नए सिस्टम से यात्रियों को तेज बुकिंग, कम सर्वर दिक्कत और ज्यादा भरोसेमंद सेवा का फायदा मिलेगा।