होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। OPEC और OPEC+ में बढ़ती दरार से वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। इसका सीधा फायदा भारत जैसे बड़े आयातक देश को मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से सस्ती और स्थिर आपूर्ति की तलाश में है।
होर्मुज बंद होने से असर
होर्मुज के बंद होने से भारत की तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। औसतन 4,80,000 बैरल प्रतिदिन की कमी दर्ज की गई है, जिसमें इराक से आने वाली सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। आम दिनों में इराक भारत को करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल देता था, जो फिलहाल बंद है।
सऊदी और UAE ने संभाला मोर्चा
इस संकट के बावजूद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को राहत दी है। सऊदी अरब ने लाल सागर मार्ग से अप्रैल में करीब 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई किया, जो पिछले औसत से ज्यादा है। वहीं UAE ने फुजेराह के जरिए 6.19 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जिससे कमी काफी हद तक पूरी हुई।
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कुल सप्लाई पर सीमित असर
अप्रैल महीने में भारत को औसतन 44 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जो सामान्य से थोड़ा कम है लेकिन बड़ा संकट नहीं बना। इसका मतलब यह है कि होर्मुज ब्लॉक होने के बावजूद भारत ने वैकल्पिक रास्तों से सप्लाई बनाए रखी है और अब OPEC में दरार से यह और बेहतर हो सकती है।
नए देशों से बढ़ी खरीद
भारत ने इस दौरान ओमान और वेनेजुएला से भी तेल खरीद बढ़ा दी है। ओमान से सप्लाई 18 हजार बैरल से बढ़कर 1 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई है, जबकि वेनेजुएला से यह आंकड़ा 2.5 लाख बैरल के करीब पहुंच गया है। इससे भारत की निर्भरता एक ही क्षेत्र पर कम हो रही है।
आगे क्या होगा असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है और रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज अभी बंद ही रह सकता है। लेकिन OPEC में दरार और नए सप्लाई स्रोतों के चलते भारत को लंबे समय में फायदा मिल सकता है। इससे न सिर्फ तेल की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि कीमतों पर भी दबाव कम हो सकता है, जो आम जनता के लिए राहत की खबर है।