पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय झंडे वाले पांच एलपीजी टैंकर फंसे हुए हैं, जिनमें लाखों टन खाना पकाने की गैस लदी है। इस हालात ने देश में गैस सप्लाई को लेकर बेचैनी बढ़ा दी है, हालांकि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
होर्मुज के पास अटके गैस से भरे जहाज
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, करीब 23 लाख टन एलपीजी से लदे पांच भारतीय टैंकर इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं। इसके अलावा एक और टैंकर जल्द ही लोड होने वाला है। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस मार्गों में गिना जाता है, ऐसे में यहां तनाव का असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है।
कुछ जहाजों से राहत की उम्मीद
तनाव के बीच राहत की खबर भी सामने आई है। पाइन गैस और जग वसंत नाम के दो जहाज इस सप्ताह भारत पहुंचने वाले हैं, जो न्यू मैंगलोर और कांडला बंदरगाह पर आएंगे। इससे घरेलू सप्लाई को कुछ सहारा मिल सकता है, हालांकि पूरी स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
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सरकार ने साफ किया ट्रांजिट नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है और यहां से गुजरने के लिए किसी विशेष अनुमति की जरूरत नहीं होती। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी जहाज से इस रास्ते पर शुल्क नहीं लिया जा सकता। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा और सही समय का आकलन करना बेहद जरूरी हो गया है।
ऊर्जा सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संकट को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि इस टकराव से पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार ने हालात से निपटने के लिए कई समूह बनाए हैं, जो लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। साथ ही भारत खाड़ी देशों, ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ संपर्क में है ताकि तनाव कम हो और व्यापारिक रास्ते सुचारू रह सकें।
भारतीयों की सुरक्षा पर सबसे ज्यादा फोकस
सरकार के अनुसार खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। होर्मुज में फंसे जहाजों पर भारतीय चालक दल भी मौजूद है, जिससे चिंता और बढ़ गई है। भारत कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है कि जहाजों का सुरक्षित आवागमन बना रहे और क्षेत्र में जल्द स्थिरता लौटे।