वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधित होने के चलते कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई भी 110 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखा। यह 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
अमेरिका-ईरान टकराव बना कारण
तेल में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और नाकेबंदी जारी रखने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही परमाणु समझौते को लेकर बातचीत भी विफल रही है, जिससे सप्लाई संकट और गहरा गया है।
आपूर्ति में कमी से बढ़ा संकट
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। यही वजह है कि बाजार में घबराहट बढ़ी और कीमतों में तेजी आई। विश्लेषकों का मानना है कि हालात ऐसे ही रहे तो तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है।
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भारत के लिए बढ़ी चिंता
भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ेगा। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
महंगाई पर पड़ेगा असर
तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है। ईंधन की कीमतें बढ़ने से हर सेक्टर प्रभावित होता है, चाहे वह खेती हो, उद्योग हो या आम उपभोक्ता। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे।
आगे क्या होगा संकेत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत के लिए यह आर्थिक चुनौती बन सकती है। फिलहाल नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी है, जहां हालात सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।