ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट चर्चा में है। यह समुद्री रास्ता सिर्फ दुनिया के तेल व्यापार के लिए ही नहीं बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की विदेशी मुद्रा कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है और उसका अधिकांश तेल इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। यही वजह है कि जब भी होर्मुज स्ट्रेट बंद होने या बाधित होने की आशंका पैदा होती है तो सबसे पहले ईरान की आय और आर्थिक स्थिति पर सवाल उठने लगते हैं।
रोजाना लाखों बैरल तेल का निर्यात
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में ईरान प्रतिदिन लगभग 24 लाख से 28 लाख बैरल तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता रहा है। कई रिपोर्टों में यह औसत 26 लाख बैरल प्रतिदिन बताया गया है। ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी में स्थित उसके प्रमुख तेल टर्मिनल और बंदरगाह इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने के लिए होर्मुज ईरान की सबसे बड़ी जरूरत माना जाता है।
हर दिन होती है हजारों करोड़ की कमाई
तेल की कीमतों और निर्यात मात्रा के आधार पर ईरान की कमाई का अनुमान लगाया जाता है। विभिन्न ऊर्जा रिपोर्टों के अनुसार प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों के बावजूद ईरान तेल निर्यात से प्रतिदिन लगभग 130 से 160 मिलियन डॉलर तक की आय अर्जित कर रहा था। कुछ अनुमानों में यह आंकड़ा 139 मिलियन डॉलर प्रतिदिन तक पहुंचा। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह करीब 1,190 करोड़ रुपये रोजाना बैठता है। यानी एक महीने में केवल तेल निर्यात से ईरान 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर सकता है। यही कारण है कि तेल क्षेत्र को ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
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होर्मुज बंद हुआ तो बढ़ेगी मुश्किल
होर्मुज स्ट्रेट केवल तेल निर्यात का रास्ता नहीं बल्कि ईरान की आर्थिक सुरक्षा का भी अहम हिस्सा है। यदि किसी कारण से यह मार्ग बाधित होता है तो तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे सरकारी राजस्व, विदेशी मुद्रा भंडार और आयात क्षमता प्रभावित हो सकती है। ईरान के पास चाबहार बंदरगाह जैसा विकल्प जरूर है लेकिन वहां से बड़े स्तर पर तेल निर्यात की पर्याप्त व्यवस्था अभी नहीं है। ऐसे में होर्मुज में लंबे समय तक रुकावट आने का मतलब होगा कि देश की आय पर सीधा दबाव बढ़ जाएगा।
दुनिया की नजर भी इसी रास्ते पर
होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ ईरान का ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात भी गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान पैदा होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत सहित उन सभी देशों पर पड़ेगा जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं। यही वजह है कि होर्मुज स्ट्रेट को केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।