दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस मार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर होर्मुज मार्ग पूरी तरह खुल जाता है तो क्या भारत में गैस की किल्लत दूर हो जाएगी और क्या एलपीजी सिलेंडर सस्ता होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आने वाली गैस और ऊर्जा उत्पादों का बड़ा भाग होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस रास्ते पर किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है। अगर मार्ग सामान्य रूप से खुला रहता है तो गैस की आपूर्ति आसान हो जाती है।
सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव कम होता है और सप्लाई चेन पूरी तरह बहाल होती है तो गैस की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। इससे रिफाइनरियों और गैस संयंत्रों को कच्चा माल समय पर मिलेगा और बाजार में आपूर्ति का दबाव कम होगा। इससे गैस की किल्लत जैसी स्थिति में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
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क्या घरेलू सिलेंडर सस्ता होगा?
हालांकि सप्लाई सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। तेल और गैस कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों, परिवहन लागत और पहले से बढ़े खर्च को भी ध्यान में रखती हैं। इसलिए कीमतों में कोई भी बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिल सकता है। फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को तुरंत बड़ी राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है।
कमर्शियल सिलेंडर पर दिख सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में गिरावट आती है तो इसका असर पहले व्यावसायिक गैस सिलेंडरों पर दिखाई दे सकता है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों की कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बाजार की नजर शांति वार्ता पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर है। अगर दोनों पक्ष किसी स्थायी समझौते पर पहुंचते हैं और क्षेत्र में स्थिरता आती है, तो ऊर्जा बाजार में भी राहत मिल सकती है। ऐसे में भारत समेत कई देशों को गैस और ईंधन आपूर्ति के मोर्चे पर फायदा मिलने की उम्मीद रहेगी।