दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी आग ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। होटल और रेस्टोरेंट में आग लगने की सबसे ज्यादा आशंका किचन से होती है। इसलिए किचन में ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन सिस्टम लगाना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके अलावा एग्जॉस्ट सिस्टम की नियमित सफाई और गैस लीक डिटेक्टर का इस्तेमाल भी जरूरी है। समय पर अलर्ट मिलने से बड़ा हादसा टाला जा सकता है।
बिजली व्यवस्था पर रखें नजर
शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग भी आग लगने की बड़ी वजह बनते हैं। होटल और रेस्टोरेंट में सुरक्षित बिजली व्यवस्था बेहद जरूरी है। इसके लिए एमसीबी और ईएलसीबी जैसे सुरक्षा उपकरण लगाए जाने चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर छह महीने में वायरिंग की जांच करानी चाहिए। पुराने तार, ढीले कनेक्शन और एक सॉकेट पर ज्यादा उपकरण चलाना जोखिम बढ़ा सकता है।
फायर सेफ्टी सिस्टम रखें सक्रिय
हर होटल और रेस्टोरेंट में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद होने चाहिए। केवल उपकरण रखना ही काफी नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को उनका इस्तेमाल भी आना चाहिए। किचन, स्टोर रूम, डाइनिंग एरिया और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म लगाए जाने चाहिए ताकि शुरुआती स्तर पर ही खतरे की जानकारी मिल सके।
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इमरजेंसी एग्जिट का रखें ध्यान
किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। इसलिए हर होटल में कम से कम दो आपातकालीन निकास मार्ग होने चाहिए। इन रास्तों को कभी बंद नहीं करना चाहिए और न ही इनके सामने सामान रखना चाहिए। नियमित रूप से कर्मचारियों को इमरजेंसी ड्रिल भी कराई जानी चाहिए ताकि संकट के समय घबराहट कम हो।
दैनिक सुरक्षा जांच जरूरी
होटल बंद करने से पहले कुछ जरूरी जांच रोजाना करनी चाहिए। गैस का मुख्य वॉल्व बंद करना, बिजली के अनावश्यक स्विच ऑफ करना और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति देखना महत्वपूर्ण माना जाता है। छोटी-छोटी सावधानियां बड़े हादसों को रोकने में मदद कर सकती हैं।
नियमों का पालन ही सबसे बड़ा बचाव
होटल या रेस्टोरेंट शुरू करने से पहले फायर एनओसी लेना और समय-समय पर फायर सेफ्टी ऑडिट कराना जरूरी है। सुरक्षा नियमों का पालन केवल कानूनी आवश्यकता नहीं बल्कि ग्राहकों और कर्मचारियों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और तैयारी ही ऐसे हादसों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।