MRI Machine: भारत में अब मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) मशीन बननी शुरू हो चुकी है। बेंगलुरु की एक छोटी स्टार्टअप कंपनी VoxelGrids कीफायती एमआरआई मशीन बना रही है और इसे भारत के हर कोने तक पहुंचा रही है। हालांकि टाटा ट्रस्ट और श्रीधर वेम्बू की Zoho से मिले फाइनेंशियल सपोर्ट ने इस कंपनी को एमआरआई मशीन बनाने और इसे भारत के हर कोने तक पहुंचाने में मदद की है। इस तकनीक के आने से मरीजों के लिए एमआरआई स्कैन की लागत लगभग 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी।
विदेशी कंपनी के ऑफर को ठुकराया
बता दें कि दशकों से अमेरिका, जर्मनी, जापान, चीन, इटली और नीदरलैंड जैसे देशों ने MRI मशीनें बनाई हैं, जिनका उपयोग दुनिया भर के अस्पताल करते हैं और भारत उनके सबसे बड़े कस्टमर्स में से एक है। VoxelGrids के संस्थापक और CEO, अर्जुन अरुणाचलम ने बताया कि दुनिया के सबसे जटिल चिकित्सा उपकरणों में से एक का निर्माण करते हुए अरबों डॉलर की कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करते हुए पैसों की कमी से जूझ रहे थे। तब उन्हें विदेशी कंपनी से बड़ा ऑफर भी मिला। लेकिन अरुणाचलम ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि विदेशी कंपनी से हाथ मिलाने पर भारतीय नवाचार खत्म हो जाता और विदेशी कंपनी ये सब कुछ हड़प लेती।
रतन टाटा और श्रीधर वेम्बू ने किया सपोर्ट
हालांकि इसके बाद भारतीय स्टार्टअप को टाटा ट्रस्ट का साथ मिला। साल 2015 में तत्कालीन अध्यक्ष रतन टाटा से मुलाकात के बाद कंपनी को पहली फंडिंग मिली, जिसने स्वदेशी मशीन के विकास को गति दी। इसके बाद 2021 में जोहो के फाउंडर की ओर से भी इस कंपनी को बड़ा सपोर्ट मिला। जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इसमें बड़ा निवेश किया।
क्यों खास है यह मशीन
अरुणाचलम ने बताया कि यह एमआरआई मशीन बाजार में मौजूद विदेशी मशीनों की तुलना में 40 प्रतिशत सस्ती और 50 प्रतिशत हल्की है। जिससे स्थापना लागत में और कमी आएगी। इससे अस्पतालों में मरीजों के लिए एमआरआई जांच का खर्च 70 प्रतिशत तक गिर जाएगा, जिससे यह सुविधा देश के दूर-दराज और छोटे शहरों तक आसानी से पहुंच सकेगी।
3500 करोड़ रुपये के आयात पर लगेगी रोक
बता दें कि भारत हर साल लगभग 3,500 करोड़ रुपये के एमआरआई से जुड़े मेडिकल उत्पाद विदेश से मंगवाता है। लेकिन VoxelGrids की यह स्वदेशी तकनीक भारत को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिर कदम साबित हो रही है।
कैसे तैयार हुई एमआरआई मशीन
स्थापित निर्माताओं की नकल करने की कोशिश करने के बजाय, अरुणाचलम की वोक्सेलग्रिड्स ने बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत की। अरुणाचलम के अनुसार, शुरुआत में वे सिर्फ एमआरआई इमेजिंग सॉफ्टवेयर और एआई बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। लेकिन बड़ी विदेशी कंपनियों द्वारा अपने सिस्टम में बाहरी तकनीक की अनुमति न देने के कारण उन्होंने खुद की पूरी एमआरआई मशीन बनाने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि 4 इंजीनियरों से शुरू हुई टीम 33 सदस्यों के साथ भारत की अपनी एमआरआई मशीन खड़ी करने में सफल रही।