.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3D5e421a4f-5829-4407-b257-1548fc6e6022&w=3840&q=75)
Supreme Court's comment SIR case: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को बिहार के विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार को बदनाम करने की कोशिश न करें, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा IAS, IPS, IRS समेत अन्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बिहार से आते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया मतदाताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके हित में है। सुनवाई के दौरान वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पासपोर्ट व अन्य दस्तावेजों की उपलब्धता पर सवाल उठाया, जिस पर जस्टिस बागची ने कहा कि जिन दस्तावेजों से नागरिकता साबित की जा सकती है, उनकी संख्या मतदाताओं के अनुकूल है।
एसआईआर को लेकर सियासी घमासान
SIR को लेकर देश में सियासी विवाद तेज हो गया है। विपक्ष ने भाजपा पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि SIR के जरिए चुनावी प्रक्रिया में धांधली की जा रही है। राहुल ने प्रजेंटेशन के जरिए आरोप लगाया कि देश में बड़े पैमाने पर वोट की चोरी हो रही है। इस मामले को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग तक विरोध मार्च भी निकाला, लेकिन उन्हें संसद के बाहर ही रोक दिया गया।
विपक्ष की मांग और शशि थरूर का बयान
विपक्षी दलों का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव और बिहार में SIR प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि जब तक चुनावों की निष्पक्षता पर लोगों के मन में संदेह रहेगा, तब तक चुनाव आयोग की साख प्रभावित होती रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इन सवालों के स्पष्ट जवाब देने चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।