
Abandoning pet dogs: दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने पालतू और आवारा कुत्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आदेश के तहत सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने और इसमें बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई है। इसके बाद राजधानी के कई पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्रों में फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई है, जिसमें लोग अपने पालतू कुत्तों को छोड़ने या आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्ते भी रात के अंधेरे में सड़कों पर छोड़े जा रहे हैं, जिससे आम लोगों में डर और बढ़ गया है।
एबीसी केंद्रों की बढ़ी परेशानी
कई एबीसी केंद्रों के मुताबिक, आदेश के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। नेबरहुड वूफ सेंटर की प्रभारी आयशा क्रिस्टीन बेन ने बताया कि उन्हें नसबंदी के बाद कुत्तों को उनके पुराने स्थान पर न भेजने के निर्देश मिले हैं, जिससे सेंटर की क्षमता जल्दी भरने लगी है। दूसरी ओर, एनिमल राहत बा सेरा के प्रवक्ता के अनुसार, कॉल्स की संख्या 50-70 से बढ़कर 300 पार हो गई है, जिनमें ज्यादातर लोग डर के कारण अपने पालतू, खासकर पिटबुल जैसी बड़ी नस्लों को छोड़ रहे हैं।
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लोगों में बढ़ा असमंजस और डर
स्थानीय निवासी मानते हैं कि आदेश के बाद अगर आवारा कुत्तों को नहीं हटाया गया तो उनकी संख्या और बढ़ सकती है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। वहीं, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदेश का उद्देश्य कुत्तों के प्रति क्रूरता रोकना है, लेकिन इसके लिए ठोस प्रबंधन और जागरूकता अभियान जरूरी हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, इसलिए प्रशासन को इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखकर संतुलित कदम उठाने होंगे।