रांची वनडे में भारत की जीत जितनी चर्चा में रही, उतना ही तेज गेंदबाज हर्षित राणा का एक कदम सुर्खियों में छा गया। दक्षिण अफ्रीका की पारी के 22वें ओवर में डेवाल्ड ब्रेविस का विकेट लेने के बाद राणा ने ऐसा इशारा किया, जिससे लगा कि वह विपक्षी खिलाड़ी को उकसा रहे हैं। यह हरकत कैमरे में कैद हुई और आईसीसी ने तुरंत इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना। मैच का नतीजा चाहे जो रहा हो, मगर इस घटना ने माहौल गरमा दिया।
ICC ने क्यों दी सज़ा
आईसीसी ने राणा पर लेवल-1 अपराध का आरोप लगाया, जिसमें खिलाड़ी द्वारा अपमानजनक, भड़काऊ या उकसाने वाला जश्न शामिल होता है। इस मामले में राणा पर आधिकारिक चेतावनी और एक डिमेरिट पॉइंट दर्ज किया गया। राणा ने मैच रेफरी रिची रिचर्डसन का फैसला तुरंत स्वीकार कर लिया, जिससे सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। आरोप मैदानी और टीवी अंपायरों की रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए थे, जिससे मामला मजबूत था।
नियमों में क्या प्रावधान हैं
लेवल-1 उल्लंघन भले ही सबसे हल्के मामलों में गिना जाता है, लेकिन इसके नतीजे लंबे समय तक असर डालते हैं। इस स्तर पर खिलाड़ी को फटकार, मैच फीस का कटाव या एक-दो डिमेरिट अंक मिल सकते हैं। राणा को मिला डिमेरिट पॉइंट उनके 24 महीनों में पहला है। नियम कहते हैं कि कोई खिलाड़ी दो साल में चार डिमेरिट पॉइंट जमा कर लेता है, तो वे निलंबन अंक में बदल जाते हैं। इसके बाद खिलाड़ी को एक टेस्ट, दो वनडे या दो T20 से बाहर होना पड़ता है। यानी हल्का सा जश्न भी बड़ी मुसीबत बना सकता है।
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राणा के लिए आगे क्या चुनौती
यह मामला छोटा जरूर है, लेकिन भविष्य में राणा को मैदान पर अपने एक्सप्रेशन पर सावधानी रखनी होगी। तेज गेंदबाज अक्सर विकेट लेने के बाद आक्रामक अंदाज में जश्न मनाते हैं, मगर आईसीसी इस बात को बहुत गंभीरता से देखता है कि कोई खिलाड़ी विपक्षी को उकसाने वाला संकेत न दे। टीम प्रबंधन भी चाहेगा कि युवा गेंदबाज अपने खेल पर फोकस करें और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहें। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले राणा के लिए यह चेतावनी आगे के सफर में सीख साबित हो सकती है।