CBSE Class 12 Re-evaluation: सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आने के बाद री-इवैल्यूएशन और On Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिले हैं। इस पूरे विवाद और छात्रों की नाराजगी को देखते हुए CBSE बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और छात्रों को बड़ी राहत देने वाले कई महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं।
री-इवैल्यूएशन फीस घटा दी गई
सीबीएसई बोर्ड की ओर से छात्रों को राहत देने के लिए री-इवैल्यूएशन फीस घटा दी गई है। बता दें, छात्र अपनी आंसर शीट अब मात्र 100 रुपये में देख सकते हैं। इससे पहले आंसर शीट देखने के लिए 700 रुपये देना पड़ता था। वहीं री-इवैल्यूएशन के लिए उन्हें प्रति सवाल 25 रुपये देने होंगे। इसी बीच छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर री-इवैल्यूएशन के बाद उनके नंबर बढ़ जाते हैं, तो क्या उनके पैसे डूब जाएंगे?
पूरी फीस होगी वापस
CBSE बोर्ड ने साफ किया है कि अगर दोबारा जांच में किसी भी छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो उसकी पूरी फीस वापस कर दी जाएगी। सीबीएसई की इस घोषणा को छात्रों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
3 फीसदी की गिरावट आई
बता दें कि इस बार के रिजल्ट में पिछले साल की तुलना में पास प्रतिशत में 3 फीसदी की गिरावट आई है। कुछ छात्रों को यह भी लग रहा है कि उन्हें वास्तव में मिले अंकों से अधिक अंक मिलने चाहिए थे। शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि बोर्ड का मकसद छात्रों को राहत देना है। बोर्ड नहीं चाहता कि किसी भी छात्र को ऐसा लगे कि उसकी मेहनत के साथ इंसाफ नहीं हुआ।
क्या है OSM सिस्टम?
दरअसल, इस साल CBSE ने कॉपियों को जांचने के लिए OSM (On Screen Marking) सिस्टम का इस्तेमाल किया है। इसमें छात्रों की आंसरशीट को स्कैन करके कंप्यूटर पर डिजिटल तरीके से चेक किया गया। रिजल्ट जारी होने के बाद कई छात्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिले हैं। इन शिकायतों के बाद CBSE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि OSM कोई नया सिस्टम नहीं है, इसका इस्तेमाल पहले भी होता रहा है। इस बार करीब 98 लाख आंसरशीट स्कैन की गईं और जिन कॉपियों में स्कैनिंग की कोई भी दिक्कत थी, उन्हें शिक्षकों द्वारा हाथ से मैन्युअली चेक किया गया है।