IMD marks 151 years: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने 151वें स्थापना दिवस के मौके पर भविष्य की मौसम सेवाओं को लेकर सरकार की नई दिशा और योजनाओं को सामने रखा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक, डेटा-आधारित और शहर-केंद्रित बनाया जा रहा है। सरकार का फोकस अब हाइपर-लोकल स्तर तक मौसम की जानकारी पहुंचाने पर है, ताकि आम लोगों से लेकर नीति निर्धारकों तक सभी को बेहतर फैसले लेने में मदद मिल सके।
चार महानगरों में 200 स्टेशन
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2026 में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में कुल 200 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। हर शहर में 50-50 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे मौसम से जुड़ा सूक्ष्म और उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा मिल सकेगा। इसके साथ ही देशभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।
तकनीक का बढ़ता असर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि बीते वर्षों में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। चक्रवात ट्रैकिंग, भारी बारिश और तापमान पूर्वानुमान में पहले की तुलना में कहीं बेहतर नतीजे सामने आए हैं। स्वचालित मौसम स्टेशनों का घना नेटवर्क अचानक बदलते मौसम की घटनाओं को समय रहते पहचानने में मदद करेगा।
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कई क्षेत्रों को लाभ
मंत्री ने कहा कि डेटा-आधारित पूर्वानुमान केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि, विमानन, शहरी नियोजन और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी अहम निर्णय लिए जा सकेंगे। यह पहल मौसम से जुड़ी जोखिमों को कम करने और आर्थिक नुकसान को रोकने में सहायक होगी।
वैश्विक सहयोग
भारत अब पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भी मौसम और आपदा संबंधी जानकारी उपलब्ध करा रहा है। पिछले एक दशक में देश का मौसम रडार नेटवर्क लगभग तीन गुना बढ़ा है और अब अधिकांश भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है। कार्यक्रम में IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भी भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार साझा किए।