अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने चीन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अपनी ताजा समीक्षा रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा है कि चीन की मौजूदा आर्थिक नीतियां सिर्फ उसके लिए ही नहीं, बल्कि बाकी दुनिया के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रही हैं। संस्था ने साफ कहा कि चीन को तुरंत अपने आर्थिक मॉडल में बदलाव करना चाहिए।
बड़े अधिशेष पर जताई चिंता
आईएमएफ ने चीन के बढ़ते चालू खाता अधिशेष पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन का निर्यात बहुत तेजी से बढ़ा है, जिससे उसका अधिशेष रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बताया गया कि पिछले साल निर्यात, आयात से करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर ज्यादा रहा। यह उसकी जीडीपी का लगभग 3.7 प्रतिशत तक पहुंच गया। इससे व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बढ़ रहा है।
घरेलू मांग कमजोर पड़ रही
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीन की मुद्रा कमजोर होने से निर्यात को फायदा मिला है, लेकिन घरेलू मांग घट रही है। आयात में कमी और कीमतों में गिरावट की स्थिति चिंता का विषय है। आईएमएफ का मानना है कि केवल निर्यात पर निर्भर रहना लंबी अवधि में सही रणनीति नहीं है।
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विकास दर पर भी अनुमान
आईएमएफ ने चीन की वृद्धि दर को लेकर भी अनुमान जारी किया है। 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था करीब 5 प्रतिशत बढ़ी थी, लेकिन इस साल यह घटकर लगभग 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में चीन को अपनी विकास दर बनाए रखने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी।
घरेलू खपत बढ़ाने की सलाह
आईएमएफ ने चीन को सलाह दी है कि वह निर्यात आधारित मॉडल से हटकर घरेलू उपभोग को बढ़ावा दे। संस्था का कहना है कि अगर चीन अपने लोगों की खरीद क्षमता बढ़ाए और अंदरूनी बाजार को मजबूत करे तो वैश्विक असंतुलन कम हो सकता है। इससे दूसरे देशों पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।
चीन का जवाब भी आया सामने
आईएमएफ की आलोचना पर चीन ने अपनी बात रखी है। चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि देश की निर्यात वृद्धि प्रतिस्पर्धा और नई तकनीक की वजह से हुई है। उनका कहना है कि चीन की नीतियां संतुलित हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं। हालांकि आईएमएफ की चेतावनी के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।