वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान दावोस में उस वक्त हलचल मच गई, जब इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने भारत को एआई के मामले में सेकंड टियर पावर बताया। एआई के वैश्विक असर पर हो रही चर्चा के दौरान उन्होंने अमेरिका, डेनमार्क और सिंगापुर को टॉप ग्रुप में रखा, जबकि भारत को दूसरे स्तर का देश बताया। यह बयान सामने आते ही मंच पर माहौल बदल गया।
IMF चीफ ने भारत को कहां रखा
IMF प्रमुख ने कहा कि भारत ने लंबे समय से आईटी सेक्टर में निवेश किया है और उसकी नींव मजबूत है, लेकिन एआई के क्षेत्र में वह अभी सबसे आगे नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने भारत को सेकंड टियर एआई पावर की श्रेणी में रखा। उनके इस बयान को भारत की तकनीकी क्षमता को कम आंकने के तौर पर देखा गया।
अश्विनी वैष्णव का सीधा जवाब
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बयान का तुरंत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि IMF का मापदंड उन्हें नहीं पता, लेकिन दुनिया के भरोसेमंद संस्थान भारत को अलग जगह पर रखते हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी भी हालत में सेकंड टियर नहीं बल्कि फर्स्ट ग्रुप में है।
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स्टैनफोर्ड रिपोर्ट का हवाला
अश्विनी वैष्णव ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत एआई पेनेट्रेशन और एआई तैयारी में दुनिया के टॉप तीन देशों में शामिल है। एआई टैलेंट के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के सामने भारत को सेकंड टियर कहना सही नहीं ठहरता।
बड़े मॉडल नहीं असली कमाई
मंत्री ने यह भी साफ किया कि एआई में सफलता सिर्फ बहुत बड़े मॉडल बनाने से नहीं आती। उन्होंने कहा कि ज्यादातर काम मध्यम आकार के मॉडल से हो जाता है, जिन्हें भारत पहले ही कई सेक्टरों में लागू कर चुका है। इससे उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ रही है और यही असली फायदा है।
एआई के हर स्तर पर भारत मजबूत
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एआई की पांचों परतों एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है और बड़े वैश्विक टेक खिलाड़ी भारत में निवेश बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को एआई में एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार मान रही है।