
भारत और रूस के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इसके तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) मिलकर भारत में यात्री विमान SJ-100 का निर्माण करेंगी। यह विमान भारतीय विमानन उद्योग के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह अहम कदम होगा।
इस समझौते में क्या है अहम
भारत में SJ-100 यात्री विमान का निर्माण किया जाएगा। ये एक ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी विमान है। इस विमान में लगभग 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी और इसकी रेंज करीब 3000 किलोमीटर होगी। इस विमान का उपयोग क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने और छोटे शहरों को हवाई सेवाओं से जोड़ने के लिए किया जाएगा।
200 से अधिक विमानों की जरूरत
भारत को अगले 10 वर्षों में क्षेत्रीय संपर्क के लिए 200 से अधिक इस तरह के विमानों की जरूरत होगी। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। भारत वैश्विक विमानन उद्योग में एक नई पहचान बनाएगा।
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रूस के बीच मजबूत होती साझेदारी
यह समझौता भारत और रूस के बीच मजबूत होती साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। भारत के विमानन उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।
ये कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का अनुमान है कि उड़ान योजना के तहत देश के अंदर क्षेत्रीय हवाई यात्रा को बेहतर बनाने को लेकर भारत को अलगे 10 सालों में एसजे-100 जैसे 200 से अधिक विमानों की जरूरत होगी। इस तरह हिंद महासागर क्षेत्र में छोटे अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ान भरने को लेकर करीब 350 और विमानों की आवश्यकता है। भारत में एसजे-100 विमान को लेकर भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में एक अहम उपलब्धि मान रहा है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य का समर्थन करती है। यह प्रोजेक्ट निजी कंपनियों को बढ़ावा देगी। विमानन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई रोजगार को उत्पन्न करेगी।