Rajnath Singh fears global impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार हो रहे हमलों के बीच भारत ने भी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई है। भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि क्षेत्र में जो घटनाएं हो रही हैं, वे सामान्य नहीं हैं और आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। उन्होंने यह टिप्पणी कोलकाता में आयोजित एक समुद्री सम्मेलन को संबोधित करते हुए की, जहां उन्होंने वैश्विक सुरक्षा और समुद्री रणनीति पर भी विस्तार से बात की।
ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा
रक्षा मंत्री ने कहा कि पर्शियन गल्फ और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे इलाकों में अस्थिरता या टकराव की स्थिति पैदा होने पर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता बल्कि वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
सुरक्षा के लिए चुनौती
राजनाथ सिंह के अनुसार मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य काफी जटिल होता जा रहा है। कई देश जमीन, समुद्र और हवा के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है और यह भी आशंका है कि असामान्य हालात धीरे-धीरे सामान्य स्थिति का रूप ले सकते हैं।
#WATCH | Kolkata | On the impact of US-Israel vs Iran conflict, Defence Minister Rajnath Singh says, "Strait of Hormuz or the entire Persian Gulf region is a crucial area for global energy security. When there is a disruption or interruption in this region, it directly impacts… pic.twitter.com/WTXKH4efB7
— ANI (@ANI) March 6, 2026
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रणनीतिक भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज समुद्री क्षेत्र केवल व्यापारिक मार्ग या नौसैनिक ताकत तक सीमित नहीं रहा है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति से भी जुड़ गया है। उनके अनुसार मजबूत समुद्री रणनीति से देश अपनी सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता में भी योगदान दे सकता है।
भारत की बढ़ती क्षमता
अपने संबोधन में उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय नौसेना के लिए तैयार हो रहे कई युद्धपोत और पनडुब्बियां देश के ही शिपयार्ड में बन रही हैं। उनका कहना था कि डिजाइन से लेकर निर्माण और रखरखाव तक की क्षमता देश में विकसित हो रही है, जो आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।