आज की दुनिया में किसी देश की विदेश नीति उतनी ही प्रभावी मानी जाती है, जितनी मजबूत उसकी सैन्य शक्ति होती है। जिन देशों के पास सशक्त रक्षा तंत्र होता है, वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बिना दबाव अपने हित रख पाते हैं। यही कारण है कि अमेरिका, चीन जैसे देश अपने रक्षा बजट पर लगातार भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिका ने 2027 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है, वहीं चीन भी हर साल सैन्य खर्च में तेजी से इजाफा कर रहा है। ऐसे माहौल में भारत के रक्षा बजट 2026 को बेहद अहम माना जा रहा है।
जीडीपी के मुकाबले घटता भारत का रक्षा खर्च
भारत के रक्षा खर्च पर नजर डालें तो बीते 15 वर्षों में एक अहम बदलाव दिखता है। 2010-11 में रक्षा बजट जीडीपी का 2.71 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर करीब 1.90 प्रतिशत रह गया है। यानी वैश्विक तनाव बढ़ने के बावजूद जीडीपी के अनुपात में रक्षा खर्च सीमित होता गया है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मौजूदा बजट भविष्य की चुनौतियों के लिए पर्याप्त है, खासकर तब जब सीमाओं के साथ-साथ साइबर और तकनीकी युद्ध भी बढ़ रहे हैं।
वैश्विक तनाव और भारत की रणनीतिक चुनौती
आज दुनिया यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट और एशिया में बढ़ते तनाव से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत के सामने सिर्फ सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति बनने की चुनौती भी है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि रक्षा बजट अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश बन चुका है। जब भारत रक्षा उपकरणों का निर्यात करता है, तो वह सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि अपनी सामरिक ताकत भी दुनिया को दिखाता है।
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डिफेंस सेक्टर से अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा बल
रक्षा क्षेत्र आज हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बन चुका है। यह टेक्नोलॉजी, एमएसएमई और स्किल डेवलपमेंट को एक साथ जोड़ता है। इससे आयात घटता है, निर्यात बढ़ता है और अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलता है। फिलहाल रक्षा क्षेत्र का योगदान जीडीपी में करीब 2 प्रतिशत है, जिसे सही नीतियों से 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। यही वजह है कि रक्षा बजट 2026 को आर्थिक विकास से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
जरूरी सुधारों के बिना अधूरा सपना
विशेषज्ञ मानते हैं कि आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए कुछ ठोस कदम जरूरी हैं। रक्षा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, टेंडर सिस्टम की समस्याओं पर नियंत्रण, सेना की खरीद में स्वदेशी उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाना और एमएसएमई को सस्ता कर्ज व समय पर भुगतान सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इन सुधारों के बिना आत्मनिर्भर भारत का रक्षा सपना पूरा नहीं हो पाएगा।
आधुनिक युद्ध और भविष्य की तैयारी
आज का युद्ध सिर्फ बंदूक और तोप तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और ड्रोन जैसी तकनीकें निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बजट 2026 में वायुसेना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बेसिक इंडस्ट्री पर खास ध्यान देना होगा। जब तक देश की औद्योगिक क्षमता मजबूत नहीं होगी, तब तक लंबे युद्ध की तैयारी संभव नहीं है। साफ है कि रक्षा बजट 2026 सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला हो सकता है।