India Defence Deal : स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी उपलब्धियां सामने आई हैं। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 1,577 करोड़ रुपये के दो समझौते किए हैं। इन डील के तहत सेना के लिए आधुनिक लोइटर म्यूनिशन सिस्टम, गोला-बारूद और अन्य जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे। खास बात यह है कि यह खरीद भारतीय कंपनियों से की जा रही है। इससे सेना की जरूरतें पूरी होने के साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रक्षा उत्पादन ने बनाया रिकॉर्ड
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि देश का घरेलू रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वर्ष 2014 में यह आंकड़ा करीब 46 हजार करोड़ रुपये था। यानी लगभग एक दशक में रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है। इस उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और सरकारी संस्थाओं की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी रही, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 24 फीसदी हो गया है। सरकार के मुताबिक यह रक्षा निर्माण में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
निर्यात में भी बड़ी छलांग
भारत ने रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। वित्त वर्ष 2013-14 में रक्षा निर्यात महज 686 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आज भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं और देश में 145 रक्षा निर्यातक कंपनियां सक्रिय हैं। सरकार ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
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बढ़ा रक्षा बजट और रिसर्च
रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए बजट में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए पूंजीगत खर्च भी 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास का बजट बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले एक साल में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
स्वदेशी तकनीक से बढ़ी ताकत
भारत अब अत्याधुनिक सैन्य तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। अग्नि मिसाइल की MIRV तकनीक, RudraM-II, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-एसआर और पिनाका गाइडेड रॉकेट समेत कई प्रणालियों के परीक्षणों का जिक्र रक्षा मंत्री ने किया। स्क्रैमजेट तकनीक के लंबे परीक्षण और स्वदेशी कुशा एयर डिफेंस मिसाइल से भी भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिली है। ऐसे में 1,577 करोड़ रुपये की नई डील और 1.78 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन भारत के बढ़ते स्वदेशी रक्षा उद्योग की तस्वीर पेश करता है।