भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड डिफेंस एक्सपोर्ट दर्ज किया है। Rajnath Singh ने इसे “बड़ी छलांग” बताते हुए कहा कि यह भारत की बढ़ती स्वदेशी ताकत और वैश्विक भरोसे का संकेत है। पिछले साल के मुकाबले यह करीब 62% की शानदार वृद्धि है, जो देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाई पर ले गई है।
पांच साल में तीन गुना हुआ विस्तार
अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत का रक्षा निर्यात पिछले पांच वर्षों में लगभग तीन गुना बढ़ चुका है। FY24 में जहां यह ₹21,083 करोड़ था, वहीं FY25 में ₹23,622 करोड़ तक पहुंचा और अब FY26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में सरकारी और निजी दोनों सेक्टर का अहम योगदान रहा है।
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निजी सेक्टर भी बना मजबूत खिलाड़ी
रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) का योगदान 54.84% रहा, जबकि निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 45.16% तक पहुंच गई। निजी क्षेत्र ने ₹17,353 करोड़ का निर्यात किया, जो इस सेक्टर की तेजी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इससे यह साफ है कि अब भारत का रक्षा उद्योग केवल सरकारी नहीं, बल्कि निजी भागीदारी से भी मजबूत हो रहा है।
80 से ज्यादा देशों तक पहुंचा भारत
आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिससे उसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है। सरकार द्वारा किए गए सुधार, आसान अनुमति प्रक्रिया और डिजिटल सिस्टम ने इस सेक्टर को नई गति दी है। यह उपलब्धि भारत को दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातकों की सूची में तेजी से आगे बढ़ा रही है।