भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार दुनिया की सबसे तेज़ी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी हुई है। एक ही दिन में विदेश से आई दो बड़ी रिपोर्टों ने इस भरोसे को और मजबूत कर दिया। पहले विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, फिर डेलॉयट ने साफ कहा कि तमाम वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार रुकने वाली नहीं है। इन रिपोर्टों ने यह संदेश दे दिया कि भारत पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
डेलॉयट का अनुमान क्यों है खास
डेलॉयट की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 से 7.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की अच्छी गतिविधियों के चलते अर्थव्यवस्था को गति मिलती रहेगी। वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिका की टैरिफ नीति और विकसित देशों में नीतिगत बदलाव जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
वैश्विक चुनौतियों में भी मजबूत प्रदर्शन
डेलॉयट ने बताया कि रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी जैसी दिक्कतों के बाद भी भारत ने संतुलन बनाए रखा है। घरेलू सुधार, सरकारी नीतियां और त्योहारों के दौरान बढ़ी खपत ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में नाममात्र जीडीपी वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत रह सकती है, जो वैश्विक माहौल के हिसाब से काफी मजबूत मानी जा रही है।
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नई डील्स से बढ़ा भारत का दायरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने फ्री ट्रेड समझौतों के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है। ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान जैसे देशों के साथ समझौते हुए हैं, जबकि इजराइल के साथ व्यापार और निवेश को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। इससे भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी नए मौके मिल रहे हैं। हालांकि डेलॉयट का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक दबावों के कारण ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट ने बढ़ाया भरोसा
डेलॉयट से पहले विश्व बैंक ने भी भारत के लिए अच्छी खबर दी। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.3 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर भारत पर सीमित रहेगा, क्योंकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।
घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत
विश्व बैंक ने साफ कहा कि टैक्स में कटौती और ग्रामीण आय में बढ़ोतरी से घरेलू खपत को मजबूती मिली है। यही वजह है कि वैश्विक उतार चढ़ाव के बावजूद भारत का आर्थिक आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। दोनों अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट यह संकेत देती हैं कि आने वाले समय में भी भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे भरोसेमंद और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती रहेगी।