पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों ने ईरान को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। राजधानी तेहरान से लेकर कई बड़े शहरों तक तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। यह संकट केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के हर कदम पर नई दिल्ली पैनी नजर बनाए हुए है।
भारत ईरान पर नजर क्यों रखे हुए है
भारत और ईरान के रिश्ते भावनात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरतों पर टिके रहे हैं। जब भी पाकिस्तान ने भारत को अपनी जमीन के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने से रोका, तब ईरान भारत के लिए सबसे अहम विकल्प बनकर सामने आया। ईरान के जरिए भारत को पश्चिम और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता मिला, जिससे भारत की क्षेत्रीय रणनीति को मजबूती मिली।
बदलते हालात क्यों बढ़ा रहे हैं खतरा
आज हालात पहले से ज्यादा जटिल हैं। एक तरफ बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता की चर्चाएं हैं, दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके साथ ही चीन का बढ़ता प्रभाव और अमेरिका की सख्त आर्थिक नीतियां वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। ऐसे में अगर ईरान में संकट और गहराया, तो भारत के लिए विकल्प सीमित होते चले जाएंगे।
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भारत के लिए ईरान की असली अहमियत
ईरान भारत के लिए सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रास्ता है। यही वह देश है जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से जोड़ता है। इसी सोच के तहत भारत ने चाबहार पोर्ट परियोजना में निवेश किया। यह परियोजना भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह क्षेत्रीय राजनीति में संतुलन बनाए रख सके।
चाबहार केवल बंदरगाह नहीं
रणनीतिक मामलों के जानकार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार भारत के लिए जीवनरेखा की तरह है। जब भी पाकिस्तान ने रास्ता रोका, ईरान ने भारत के लिए दरवाजे खोले। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और अफगानिस्तान में बदले हालात के कारण इस परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसकी अहमियत अब भी बनी हुई है।
सत्ता परिवर्तन से भारत की मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में लंबे समय तक अस्थिरता रहती है या सत्ता परिवर्तन होता है, तो इसका सीधा असर भारत के दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा। इससे भारत की पश्चिम और मध्य एशिया तक पहुंच कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि अमेरिका के हर एक्शन पर भारत अलर्ट है, क्योंकि ईरान में आया बड़ा झटका भारत की रणनीति को भी हिला सकता है।