मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट ने दुनिया के कई देशों को मुश्किल में डाल दिया है। तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ने से कई देशों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच भारत ने अपनी रणनीति से हालात को काफी हद तक संभाल लिया है। सरकार का ‘प्लान-बी’ यानी ‘स्पेशल-41’ अब असर दिखा रहा है।
क्या है ‘स्पेशल-41’ प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर रहना छोड़ दिया है। पहले जहां देश केवल 27 देशों से तेल-गैस आयात करता था, अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। इसी रणनीति को ‘स्पेशल-41’ कहा जा रहा है, जिसने संकट के समय भारत को बड़ी राहत दी है।
कई देशों से आ रहा तेल-गैस
भारत अब रूस, अंगोला, नाइजीरिया, कांगो, गैबॉन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी तेल और गैस मंगा रहा है। इसके अलावा एशिया-प्रशांत और वेस्ट अफ्रीका के देशों से भी आयात बढ़ाया गया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि अगर एक क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होती है, तो दूसरे विकल्प तुरंत उपलब्ध रहें।
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संकट में भी नहीं डगमगाई सप्लाई
होर्मुज संकट के बावजूद भारत में ऊर्जा सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं हुई। हाल ही में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। साथ ही सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी मजबूत किया है, जिससे आपात स्थिति में देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहे।
दूसरे देशों में बिगड़े हालात
जहां भारत ने इस संकट को संभाल लिया, वहीं कई देश इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है और सरकारी खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। वहीं साउथ कोरिया में भी ऊर्जा बचत के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता पर असर पड़ा है।
भारत की तैयारी ने दिलाई बढ़त
सरकार की दूरदर्शी नीति, आयात के विविधिकरण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर ने भारत को इस संकट में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। यही वजह है कि जहां दुनिया परेशान है, वहीं भारत हालात को संभालते हुए आगे बढ़ रहा है।