पिछले साल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से जाने वाले सामान पर दो बार 25-25 फीसदी टैरिफ लगाया था। इसके बाद भारतीय उत्पादों पर कुल 50 फीसदी तक शुल्क लग गया। इस फैसले से भारत के निर्यातकों को करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। खासकर टेक्सटाइल, स्टील और केमिकल सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ा। उस समय यह माना जा रहा था कि भारत को इस नुकसान से उबरने में काफी वक्त लगेगा।
अब भारत का बड़ा दांव
लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। भारत ने ऐसा दांव चला है, जिससे ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि उससे करीब 10 गुना ज्यादा कमाई का रास्ता खुल सकता है। यह दांव है भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता। उम्मीद है कि 27 जनवरी को इस समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है। इस एक डील से भारत को यूरोप के 27 देशों में बिना शुल्क व्यापार करने का मौका मिलेगा।
क्यों खास है भारत-यूरोप FTA
इस डील को दोनों पक्ष ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कह रहे हैं। वजह साफ है, एक साथ 27 देशों का बड़ा बाजार भारत के लिए खुल जाएगा। अभी यूरोप भारत के कुल निर्यात का करीब 17 फीसदी हिस्सा है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के बाद यह हिस्सेदारी 2031 तक बढ़कर 22 से 23 फीसदी तक पहुंच सकती है। इससे भारतीय कंपनियों को नया बाजार मिलेगा और निर्यात को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।
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निर्यात में आएगा बड़ा उछाल
रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर यह समझौता लागू होता है तो भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्लस 2031 तक करीब 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अभी भारत का यूरोप के साथ व्यापार सीमित दायरे में है, लेकिन शुल्क हटते ही भारतीय सामान वहां सस्ता और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। इससे छोटे और मझोले कारोबारियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
यूरोप को भी क्यों है फायदा
यह डील सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि यूरोप के लिए भी फायदेमंद मानी जा रही है। यूरोप चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और रूस से ऊर्जा सप्लाई में आई दिक्कतों के बाद नए भरोसेमंद साझेदार ढूंढ रहा है। भारत इस खाली जगह को भर सकता है। यही वजह है कि यूरोप में भारतीय तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल उत्पादों की मांग पहले से बढ़ने लगी है।
कौन से सेक्टर होंगे सबसे बड़े विजेता
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर को भी नई ताकत मिलेगी। कुल मिलाकर यह डील भारत के लिए सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि उस नुकसान का जवाब है जो कभी ट्रंप के टैरिफ ने दिया था। अब सबकी नजर 27 जनवरी पर टिकी है, जब यह बड़ी डील हकीकत बन सकती है।