भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाले रणधीर सिंह का 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे रणधीर सिंह ने नई दिल्ली स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर फैल गई है।
निशानेबाजी में रचा था इतिहास
रणधीर सिंह भारतीय खेल इतिहास का एक बड़ा नाम रहे। उन्होंने 1978 बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया था। यह एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत का पहला स्वर्ण था। उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
5 ओलंपिक में किया देश का प्रतिनिधित्व
रणधीर सिंह सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि भारतीय खेलों की मजबूत पहचान थे। उन्होंने कई ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। टोक्यो से लेकर लॉस एंजिल्स तक उनका सफर भारतीय खेलों के लिए प्रेरणा बन गया। मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्होंने अपनी खास छाप छोड़ी।
प्रशासनिक भूमिका में भी बड़ा योगदान
खेल करियर के बाद रणधीर सिंह ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव रहे और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।
परिवार से भी खेलों का रिश्ता
रणधीर सिंह का परिवार भी खेलों से जुड़ा रहा। उनकी बेटी राजेश्वरी भी एक जानी-मानी निशानेबाज हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं। परिवार और खेल जगत दोनों के लिए यह क्षति बेहद भावुक करने वाली मानी जा रही है।
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एक युग का अंत
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ सहित कई खेल संस्थाओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। खेल जगत उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी या प्रशासक नहीं बल्कि प्रेरणा और नेतृत्व की मिसाल के रूप में याद करेगा। उनके जाने से भारतीय खेलों का एक महत्वपूर्ण अध्याय हमेशा के लिए इतिहास बन गया