देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को लेकर चल रही चिंताओं के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलएनजी टैंकर दिशा सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करके गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुंच गया है। माल्टा के झंडे वाला यह जहाज करीब 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) लेकर भारत आया है। बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार जहाज को पेट्रोनेट एलएनजी जेटी पर खड़ा किया गया है और अब गैस आपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ईरान युद्ध के बाद पहला बड़ा संकेत
करीब साढ़े तीन महीने पहले शुरू हुए ईरान संकट के बाद यह पहला भारतीय एलएनजी टैंकर है जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया है। अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती संघर्ष विराम की घोषणा के बाद यह जहाज उस रास्ते से गुजरने वाले पहले वाणिज्यिक जहाजों में शामिल रहा। जहाज का संचालन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले समूह द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने चार्टर किया है। इस सफल यात्रा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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सरकार पहले ही दे चुकी थी जानकारी
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने एक दिन पहले ही संकेत दे दिया था कि एलएनजी टैंकर 19 जून को दाहेज पहुंच जाएगा। मंत्रालय के अनुसार जहाज 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुका था और उसके बाद लगातार उसकी निगरानी की जा रही थी। जहाज के सुरक्षित पहुंचने से यह साफ संकेत मिला है कि संघर्ष विराम के बाद समुद्री व्यापार धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। इसमें भी करीब 65 प्रतिशत एलएनजी खाड़ी देशों, खासकर कतर से आती है और इसका मुख्य रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य ही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी, जिससे गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी। अब संघर्ष विराम के बाद ईरान ने सीमित अवधि के लिए जहाजों की आवाजाही की अनुमति दी है। ऐसे में एलएनजी टैंकर दिशा का सुरक्षित भारत पहुंचना ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और आने वाले दिनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।