पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि कहीं ईंधन की कमी न हो जाए। लेकिन सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए साफ कहा है कि देश में फिलहाल तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। संसद में दिए गए बयान में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अफवाहों से बढ़ी मांग, सरकार की अपील
सरकार के अनुसार हाल के दिनों में ईंधन की मांग अचानक बढ़ी है। इसकी वजह वास्तविक कमी नहीं बल्कि अफवाहें हैं। मंत्री ने कहा कि लोगों में घबराहट के कारण गैस सिलेंडर की बुकिंग तेजी से बढ़ गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की हैं। ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को अब 45 दिनों के भीतर दूसरी बुकिंग करने की सुविधा दी जाएगी ताकि आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके।
रिफाइनरियां पूरी क्षमता से कर रहीं काम
सरकार का कहना है कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। यानी तेल और गैस का उत्पादन सामान्य स्तर पर जारी है। इसके साथ ही व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति भी फिर से शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है और लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
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तेल कंपनियों ने भी दिया भरोसा
देश की बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने भी इस मुद्दे पर बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति लगातार जारी है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। कंपनी ने लोगों से अपील की है कि वे सिर्फ भरोसेमंद जानकारी पर ही विश्वास करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
भारत की ऊर्जा जरूरतें और आयात
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अनुमान के अनुसार देश लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था भी कर रही है।
वैश्विक स्तर पर भी उठाए जा रहे कदम
दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अमेरिका ने अपने आपात भंडार से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल बाजार में जारी करने का फैसला लिया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी से जुड़े देश भी अपने भंडार से तेल उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक बाजार पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में है।