देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है। दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह पहले लगाए गए 7.4 प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा है। त्योहारी सीजन में बढ़ी खरीदारी और कुछ क्षेत्रों में टैक्स राहत से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिला। उत्पादन और सेवाओं में सुधार ने भी विकास दर को मजबूत बनाया।
पिछले साल से बेहतर स्थिति
अगर सालाना आधार पर देखें तो तस्वीर और साफ होती है। एक साल पहले इसी तिमाही में विकास दर 6.2 प्रतिशत थी। हालांकि पिछली तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत रही थी, इसलिए तिमाही दर तिमाही थोड़ी नरमी दिखती है। लेकिन कुल मिलाकर साल भर में अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।
नया बेस ईयर, नए आंकड़े
सरकार ने अब 2011-12 की जगह 2022-23 को नया बेस ईयर मान लिया है। इसी आधार पर नए आंकड़े जारी किए गए हैं। बेस ईयर बदलने से अर्थव्यवस्था की तुलना आधुनिक ढांचे और ताजा संरचना के मुताबिक की जाती है। इससे विकास दर का आकलन ज्यादा सटीक माना जाता है।
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सरकारी खर्च और घाटे की स्थिति
जनवरी 2026 तक देश का फिस्कल डेफिसिट 9.81 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में सरकार का कुल खर्च 36.9 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं इसी अवधि में सरकारी रसीदें 27.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचीं। इससे साफ है कि सरकार विकास और योजनाओं पर खर्च बढ़ा रही है।
मांग और उत्पादन का असर
त्योहारी सीजन में बाजारों में अच्छी मांग देखने को मिली। उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ी, जिससे व्यापार और उद्योग को फायदा हुआ। कुछ क्षेत्रों में टैक्स में राहत का असर भी दिखा। उत्पादन गतिविधियों में सुधार और सेवाओं के विस्तार ने विकास दर को सहारा दिया।
आगे क्या रह सकती है दिशा
मजबूत आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है। हालांकि वैश्विक हालात और महंगाई जैसे कारक चुनौती बने रह सकते हैं। फिलहाल ताजा डेटा से यही संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक रफ्तार बरकरार है और आने वाले महीनों में भी सुधार की उम्मीद की जा सकती है।