Gold Imports India : भारत में अगस्त महीने के दौरान सोने के आयात में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में करीब 4.16 अरब डॉलर का सोना आयात हुआ था, जो अगस्त में घटकर लगभग 2.3 अरब डॉलर रह गया। सोने की खरीद में आई इस कमी का सीधा असर देश के कुल आयात बिल पर पड़ा है। भारत दुनिया के बड़े सोना खरीदार देशों में शामिल है। ऐसे में सोने के आयात में होने वाला बदलाव देश के व्यापार आंकड़ों पर भी असर डालता है।
व्यापार घाटा भी हुआ कम
अगस्त में भारत का व्यापार घाटा घटकर करीब 26.86 अरब डॉलर रह गया। व्यापार घाटा तब होता है जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज्यादा होता है। ऐसे में सोने जैसे महंगे आयात में कमी आने से कुल अंतर को कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, सिर्फ सोने के आयात को व्यापार घाटे में बदलाव की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता। कच्चे तेल, मशीनरी और दूसरी जरूरी चीजों के आयात का भी इसमें बड़ा हिस्सा होता है।
लोग सोना कम क्यों खरीद रहे
सोने की खरीद कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। सोने की कीमतों में लगातार तेजी ने आम खरीदारों के बजट पर असर डाला है। जब कीमत काफी ऊपर होती है, तो कई लोग खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। इसके अलावा, अगस्त में त्योहारों और शादी के सीजन से पहले की खरीदारी का पैटर्न भी अलग रहा हो सकता है। बड़े निवेशक और आम ग्राहक दोनों ही कीमतों को देखकर खरीदारी का फैसला लेते हैं।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा
सोने का आयात कम होने से देश को विदेशी मुद्रा खर्च करने की जरूरत कुछ कम होती है। इससे व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, सोने की मांग में गिरावट यह भी दिखा सकती है कि ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक फिलहाल खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं। इसका असर ज्वेलरी कारोबार से जुड़े कारोबारियों पर भी पड़ सकता है, खासकर अगर मांग लंबे समय तक कमजोर रहती है।
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आगे क्या देखने को मिलेगा
अब नजर आने वाले महीनों के सोने के आयात आंकड़ों पर रहेगी। अगर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो खरीदारी पर दबाव बना रह सकता है। वहीं त्योहार और शादी का सीजन शुरू होने के साथ मांग में दोबारा तेजी भी आ सकती है। फिलहाल सोने के आयात में आई गिरावट ने भारत के व्यापार घाटे को कम करने में मदद की है। हालांकि, देश की अर्थव्यवस्था पर इसका पूरा असर समझने के लिए निर्यात, कच्चे तेल की कीमत और बाकी आयात के आंकड़ों को भी साथ में देखना जरूरी होगा।