भारत का बीमा क्षेत्र एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। जानकारी के मुताबिक बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की अहम बैठक होगी, जिसमें इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है। फिलहाल यह सीमा 74% है, लेकिन 100% FDI की मंजूरी मिलते ही विदेशी कंपनियां भारत में पूरी हिस्सेदारी लेकर प्रवेश कर सकेंगी। सरकार इस बिल को अगले हफ्ते शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह में पेश करेगी। इसे संसद के एजेंडे में भी शामिल किया जा चुका है।
बीमा क्षेत्र को मिलेगी नई ऊर्जा
विशेषज्ञों की मानें तो 100% FDI से भारत के बीमा बाज़ार में पूंजी का बड़ा प्रवाह आएगा। अभी कई विदेशी कंपनियां भारत में सीमित साझेदारी के साथ काम कर रही हैं, लेकिन पूर्ण निवेश की अनुमति मिलने के बाद दुनियाभर की टॉप इंश्योरेंस कंपनियां भारतीय बाज़ार में उतर सकती हैं। इससे बीमा उद्योग का विस्तार तेज होगा, टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट क्वालिटी बेहतर होगी, और लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। देश में बीमा कवरेज बढ़ाने के लिए यह कदम गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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किन कानूनों में होगा बदलाव?
वित्त मंत्रालय ने तीन बड़े कानूनों Insurance Act 1938, IRDAI Act 1999 और LIC Act 1956 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। नए बिल के तहत विदेशी कंपनियां भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक हिस्सेदारी ले सकेंगी। हालांकि कुछ शर्तें लागू रहने की संभावना है, जैसे बीमा कंपनियों द्वारा जमा किए जाने वाले प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही निवेश करना होगा। इसका उद्देश्य घरेलू बाज़ार को मजबूत बनाए रखना है।
बजट से लेकर संसद तक-सरकार की बड़ी मंशा
वित्त मंत्री ने इस साल बजट में ही संकेत दे दिया था कि बीमा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निवेश की जरूरत है। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक हर नागरिक के पास किसी न किसी तरह का बीमा कवरेज हो। 100% FDI से न सिर्फ बीमा कंपनियों को मजबूत पूंजी मिलेगी, बल्कि ग्राहकों को बेहतर प्लान, डिजिटल सेवाएं और तेज क्लेम सेटलमेंट जैसे लाभ भी मिलेंगे। इससे लाखों रोजगार बनने की भी उम्मीद है, क्योंकि बीमा कारोबार तेजी से विस्तार करेगा।