भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियां ईरानी कच्चे तेल के सप्लायर्स और ट्रेडर्स से बातचीत कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका 21 अगस्त के बाद भी ईरान पर लगे प्रतिबंधों में छूट बढ़ाता है या राहत देता है, तो भारत फिर से ईरानी तेल खरीद सकता है। हालांकि अभी अगस्त तक की जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल पहले ही दूसरे देशों से बुक किया जा चुका है। ऐसे में फिलहाल बड़े पैमाने पर खरीद की संभावना कम है, लेकिन बेहतर छूट मिलने पर कुछ कार्गो खरीदे जा सकते हैं।
अमेरिका के फैसले पर टिकी उम्मीद
भारत की रणनीति अभी भविष्य की तैयारी पर केंद्रित है। तेल कंपनियां चाहती हैं कि अगर अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देता है तो उन्हें तुरंत ईरानी तेल खरीदने का मौका मिल सके। फिलहाल अमेरिका की ओर से दी गई सीमित छूट का पूरा फायदा भारतीय कंपनियां नहीं उठा पा रही हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही अपनी सप्लाई सुनिश्चित कर ली है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अगस्त के बाद वॉशिंगटन क्या फैसला लेता है।
ये भी पढ़ें : Meta पर 120 लाख करोड़ रुपये की पेनाल्टी की मांग, बच्चों को सोशल मीडिया का आदी बनाने का आरोप
रूस और सऊदी अरब से मिल रही कड़ी चुनौती
ईरान के लिए भारतीय बाजार में वापसी आसान नहीं होगी। रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है और वह भारी छूट पर कच्चा तेल बेच रहा है। वहीं सऊदी अरब ने भी एशियाई बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कीमतों में बड़ी कटौती की है। इसके बावजूद भारतीय कंपनियां फिलहाल रूसी तेल को ज्यादा किफायती मान रही हैं। ऐसे में ईरान को भारत में अपनी जगह बनाने के लिए और बेहतर कीमत देनी पड़ सकती है।
ऊर्जा सहयोग पर भी जारी है बातचीत
हाल ही में ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात कर ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की थी। आने वाले हफ्तों में भारतीय कंपनियां सितंबर की सप्लाई को लेकर भी बातचीत शुरू कर सकती हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक रहती है और प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो भारत एक बार फिर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार बन सकता है। फिलहाल पूरा मामला अमेरिका के अगले फैसले पर निर्भर है।