India Largest Economy Prediction : भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक प्रभाव को लेकर दुनिया के दिग्गज अर्थशास्त्री जेफरी डी. सैक्स ने बड़ा दावा किया है। उनका मानना है कि इस सदी के अंत तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है और उसकी आबादी चीन से दोगुनी हो सकती है। दूसरी ओर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा है कि भारत ने अपनी आर्थिक क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता के दम पर दुनिया का भरोसा हासिल किया है। निर्यात में बढ़ोतरी और व्यापार समझौतों को लेकर बढ़ती दिलचस्पी को भी भारत की मजबूत स्थिति का संकेत माना जा रहा है।
सदी के अंत तक भारत की बड़ी भूमिका
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफरी डी. सैक्स ने वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी में भारत की आर्थिक संभावनाओं पर बात की। 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस सदी के अंत तक भारत की आबादी चीन से दोगुनी हो सकती है। उनके मुताबिक, भारत भविष्य में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है। सैक्स ने यह भी कहा कि दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां किसी एक देश या क्षेत्र का दबदबा नहीं रहेगा।
पीयूष गोयल ने बताया भारत का दम
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में भारत की आर्थिक स्थिति और वैश्विक साझेदारी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी क्षमता और दक्षता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा कायम किया है। गोयल के अनुसार, आज दुनिया के कई देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती अहमियत का पता चलता है।
निर्यात में बढ़ोतरी से मजबूत हुई स्थिति
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से सितंबर अवधि में भारत का निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 480 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष के अंत तक कुल निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। भारत कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, जूते, चमड़ा, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों के लिए विदेशी बाजारों में बेहतर अवसर हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत कम टैरिफ और तरजीही बाजार पहुंच को लेकर बातचीत की जा रही है।
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कॉरपोरेट जिम्मेदारी को बताया अहम आधार
जेफरी सैक्स ने भारत के आर्थिक बदलाव में बड़े कारोबारी समूहों और पारिवारिक व्यवसायों की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विस्तार में अडानी समूह जैसे कारोबारी घरानों के योगदान की सराहना की। उनके मुताबिक, पारिवारिक नेतृत्व वाले कारोबार केवल मुनाफे तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके साथ विरासत और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने यूनिलीवर के पूर्व सीईओ पॉल पोलमैन का उदाहरण देते हुए कॉरपोरेट मुनाफे और सामाजिक दायित्व के बीच संतुलन की जरूरत बताई।
एआई के कारोबार और सुरक्षा पर चिंता
सैक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई उद्योग में व्यावसायिक हितों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन का सवाल भी उठाया। उन्होंने एंथ्रोपिक और उसके संभावित आईपीओ का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि कहीं उन्नत एआई से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने के बजाय कारोबारी विस्तार को प्राथमिकता तो नहीं दी जा रही। उनके विचारों और पीयूष गोयल के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत की वैश्विक भूमिका केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार नेतृत्व और तकनीकी चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी इसमें अहम होगी।