LPG Production India : मध्य पूर्व में जारी युद्ध और उससे प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति के बीच भारत ने घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की उपलब्धता मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए प्रतिदिन अधिकतम 63,810 मीट्रिक टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य देश में रसोई गैस की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और भविष्य की किसी भी कमी से निपटने के लिए अतिरिक्त भंडार तैयार करना है।
मध्य पूर्व पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत अपनी रसोई गैस जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, युद्ध से पहले भारत अपने एलपीजी आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से हासिल कर रहा था। मार्च से क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी मुश्किलों ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती बढ़ा दी। ऐसे समय में सरकार का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर यह संकेत देता है कि भारत बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम करके अपने लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना चाहता है।
रिलायंस को मिला सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य
सरकार ने अलग-अलग तेल और गैस कंपनियों के लिए उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की घरेलू बाजार पर केंद्रित रिफाइनरी को प्रतिदिन 18,000 मीट्रिक टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। वहीं ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और गेल इंडिया जैसी सरकारी कंपनियों से भी राष्ट्रीय उत्पादन लक्ष्य में योगदान की उम्मीद है।
आम परिवारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
एलपीजी सिर्फ एक औद्योगिक ईंधन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण आयात प्रभावित होने पर इसकी उपलब्धता और कीमत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से कंपनियों के पास देश के भीतर ज्यादा एलपीजी उपलब्ध कराने की क्षमता होगी। सरकार का यह कदम केवल मौजूदा संकट से निपटने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। घरेलू उत्पादन और भंडारण क्षमता मजबूत होने से भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, समुद्री मार्गों में रुकावट या वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक बदलाव आने पर भारत को कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है।
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ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
मध्य पूर्व संकट ने भारत की आयात निर्भरता को एक बार फिर सामने ला दिया है। इससे पहले भी एलपीजी आपूर्ति को लेकर सरकार ने रिफाइनरियों से उत्पादन बढ़ाने और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने जैसे कदम उठाए थे। अब उत्पादन के स्पष्ट लक्ष्य तय करना भारत की ऊर्जा नीति में घरेलू सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इन लक्ष्यों को किस स्तर तक हासिल करती हैं और इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता पर कितना असर पड़ता है।