पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिए हैं, लेकिन कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट के एमडी नीलेश शाह का मानना है कि 2026 में यह रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। कोटक म्यूचुअल फंड की 2026 आउटलुक रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि अगले साल भी बाजार से रिटर्न मिलने की संभावना है, लेकिन हाल के असाधारण उछाल को दोहराना मुश्किल होगा। शाह के मुताबिक निवेशकों को अब ज्यादा यथार्थवादी नजरिया अपनाना चाहिए और यह समझना चाहिए कि हर साल रिकॉर्ड तोड़ तेजी संभव नहीं होती। बाजार अब स्थिरता और संतुलन के दौर में प्रवेश कर रहा है।
फिस्कल पॉलिसी आगे, मौद्रिक समर्थन पीछे
नीलेश शाह ने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक नए चरण में पहुंच रही है, जहां सरकारों की नीतियां विकास को आगे बढ़ाएंगी। वहीं सेंट्रल बैंकों का मौद्रिक समर्थन धीरे-धीरे कम हो रहा है। ब्याज दरों में कटौती शुरू हो चुकी है, लेकिन वह माहौल अब नहीं रहा, जिसने पहले शेयर बाजार में तेज उछाल दिया था। उन्होंने कहा कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ पॉजिटिव बनी रहेगी, लेकिन इसकी गति 2025 के मुकाबले कुछ धीमी हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को लंबी अवधि की सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
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महंगाई से एआई तक, कई जोखिम बरकरार
शाह ने 2026 को लेकर कई वैश्विक जोखिमों की भी ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि महंगाई का दोबारा उभरना, डी-डॉलरराइजेशन और भू-राजनीतिक तनाव बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा संभावित बुलबुला और अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता भी अनिश्चितता बढ़ा सकती है। इन फैक्टर्स की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहना होगा। शाह का मानना है कि आने वाला दौर आसान नहीं, बल्कि सोच-समझकर फैसले लेने का होगा।
चीन की सुस्ती, भारत के लिए मौका
चीन को लेकर नीलेश शाह ने कहा कि आर्थिक तरक्की के बावजूद वहां का शेयर बाजार लंबे समय से सीमित दायरे में फंसा हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि CSI 300 इंडेक्स करीब 17 साल पहले के स्तर के आसपास ही है। ऐसी स्थिति में अगर चीन में बड़ी गिरावट आती है, तो वैश्विक पूंजी भारत जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर सकती है। शाह के अनुसार भारत ने पिछले एक दशक में मैक्रो स्थिरता और मजबूत बैलेंस शीट हासिल की है, जो उसे वैश्विक झटकों से बचाती है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत की ग्रोथ मिड सिंगल डिजिट में रहने की संभावना है और डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद करना फिलहाल व्यावहारिक नहीं होगा।