Microdrama Trend in India : सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड की रील्स देखने की आदत अब एक नए मनोरंजन प्रारूप की ओर बढ़ रही है। भारत में माइक्रोड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें छोटी-छोटी कड़ियों के जरिए पूरी कहानी दिखाई जाती है। शेयरचैट और मोज ने कांतर के साथ मिलकर तैयार की गई ‘स्टेट ऑफ माइक्रोड्रामा इन इंडिया’ रिपोर्ट में इस बदलती पसंद की तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 80% भारतीय दर्शक माइक्रोड्रामा को पसंद करते हैं, जबकि 86% दर्शक रोजाना 15 मिनट से ज्यादा समय इस तरह की सामग्री देखने में बिताते हैं।
रील्स से कहानी वाली कड़ियों तक पहुंचा सफर
माइक्रोड्रामा की खासियत यह है कि इसमें कम समय में कहानी को आगे बढ़ाया जाता है। हर कड़ी दर्शक के भीतर अगली कड़ी देखने की उत्सुकता पैदा करती है। यही वजह है कि यह प्रारूप उन लोगों को भी आकर्षित कर रहा है, जिनके पास लंबे धारावाहिक या फिल्म देखने के लिए ज्यादा समय नहीं होता। रिपोर्ट के अनुसार, 54% दर्शक माइक्रोड्रामा देखने के लिए दोबारा लौटते हैं। वहीं 77% दर्शकों को सोशल मीडिया फीड के जरिए नए माइक्रोड्रामा की जानकारी मिलती है।
रोजमर्रा की जिंदगी वाली कहानियां सबसे ज्यादा पसंद
माइक्रोड्रामा में दर्शकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली कहानियां उनकी अपनी जिंदगी से जुड़ी होती हैं। रिपोर्ट में 36% लोगों ने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को अपनी पसंद बताया। परिवार, रिश्ते, प्यार, संघर्ष और भावनात्मक घटनाओं जैसी कहानियां दर्शकों को आसानी से जोड़ लेती हैं।
मोबाइल ने बदल दिया मनोरंजन का तरीका
माइक्रोड्रामा की लोकप्रियता के पीछे मोबाइल मनोरंजन की बढ़ती आदत भी बड़ी वजह है। लोग यात्रा करते समय, ब्रेक के दौरान या दिन के छोटे-छोटे खाली समय में कहानी की एक-दो कड़ियां देख सकते हैं। यानी मनोरंजन अब तय समय पर टीवी या लंबे कार्यक्रम देखने तक सीमित नहीं रहा।
ब्रांड और कलाकारों के लिए भी बड़ा मौका
माइक्रोड्रामा सिर्फ दर्शकों के लिए नया मनोरंजन विकल्प नहीं है, बल्कि विज्ञापनदाताओं और कलाकारों के लिए भी बड़ा अवसर बन रहा है। रिपोर्ट में माइक्रोड्रामा विज्ञापनों के लिए 84% ब्रांड याददाश्त और 82% खरीदारी की इच्छा दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि कहानी आधारित छोटे प्रारूप में दर्शकों का जुड़ाव मजबूत हो सकता है।
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क्या यही है मनोरंजन का अगला बड़ा दौर?
रील्स ने जहां कम समय में मनोरंजन की आदत बनाई, वहीं माइक्रोड्रामा उसमें कहानी और भावनात्मक जुड़ाव जोड़ रहा है। रिपोर्ट में 14 भारतीय शहरों के 1,045 लोगों को शामिल किया गया था। ऐसे में आंकड़े संकेत देते हैं कि आने वाले समय में छोटी लेकिन लगातार चलने वाली कहानियां भारतीय डिजिटल मनोरंजन का अहम हिस्सा बन सकती हैं।