India moves quickly on Plan B: अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच भारत ने वैकल्पिक रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। 27 जनवरी 2026 को होने वाले इंडिया-EU शिखर सम्मेलन के दौरान इस डील की औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या होगा समझौते का दायरा
भारत-EU FTA में वस्तुओं, सेवाओं और व्यापार नियमों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखने का रुख साफ किया है। EU जहां 95% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ हटाने की मांग कर रहा है, वहीं भारत इसे करीब 90% तक सीमित रखना चाहता है। इस समझौते को EU परिषद और यूरोपीय संसद की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
एक्सपोर्ट पर असर
FTA के बाद भारत को यूरोप के बड़े बाजार में कम या शून्य टैरिफ पर पहुंच मिलेगी। इससे कपड़ा, ज्वेलरी, फार्मा, मशीनरी और आईटी सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यूरोप से सस्ता कच्चा माल आने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा।
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दोनों तरफ बढ़ेगा व्यापार
इस डील से यूरोपीय देशों को भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, मशीनरी और एविएशन सेक्टर में नए अवसर खुल सकते हैं। मौजूदा समय में EU से भारत आने वाले सामान पर औसतन 9% से ज्यादा टैरिफ लगता है, जो FTA के बाद कम हो सकता है।
चीन पर निर्भरता घटेगी
भारत-EU FTA से दोनों पक्षों की चीन पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। यूरोप के लिए भारत एक भरोसेमंद सप्लाई-चेन पार्टनर बन सकता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने के संकेत हैं। अनुमान है कि इस समझौते के बाद भारत-EU व्यापार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200–250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।