India-Myanmar Relations: भारत और म्यांमार ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के लिए व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विकास सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिन आंग ह्लाइंग के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, आर्थिक विकास और आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को आसान और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की। खासतौर पर रुपया-क्यात भुगतान प्रणाली के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने कृषि प्रसंस्करण, पेट्रोलियम, ऊर्जा और खनन जैसे क्षेत्रों में निवेश और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत और म्यांमार का मानना है कि आर्थिक साझेदारी मजबूत होने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मिलेगा नया बल
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाने वाली प्रमुख परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई। इनमें कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग प्रमुख हैं। भारत का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी।
शिक्षा और क्षमता निर्माण में सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम का विस्तार करने की घोषणा की। इसके तहत 2026 से छात्रवृत्तियों की संख्या 36 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। दोनों देशों ने शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इससे युवाओं को नए अवसर मिलने और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर साझा दृष्टिकोण
बैठक में सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। वहीं म्यांमार ने आश्वासन दिया कि उसकी भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा पार अपराध, उग्रवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत ने हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिया।