भारत की महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को वैश्विक तनाव के बीच बड़ी कामयाबी मिली है। कंपनी को लीबिया में तेल और गैस का नया भंडार मिला है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यह खोज ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों से जूझ रही है।
कहां मिला ये नया खजाना
यह खोज लीबिया के एरिया 95/96 ब्लॉक में हुई है, जो घडामेस बेसिन के बेहद संभावनाशील क्षेत्र में आता है। करीब 6630 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ब्लॉक में पहले भी कई कुओं में तेल और गैस मिल चुकी है। अब छठे कुएं की ड्रिलिंग के दौरान फिर से नए भंडार का पता चला है, जिससे इस क्षेत्र की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
भारत की हिस्सेदारी कितनी
इस प्रोजेक्ट में ऑयल इंडिया की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह एक भारतीय कंसोर्टियम का हिस्सा है, जिसमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड भी शामिल है। इस ब्लॉक का संचालन सिपेक्स नाम की कंपनी कर रही है और यहां कुल 8 कुओं की ड्रिलिंग की योजना बनाई गई है।
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आधिकारिक मान्यता भी मिली
लीबिया की नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन ने इस खोज को ब्लॉक की पांचवीं आधिकारिक खोज के रूप में मान्यता दे दी है। इसका मतलब है कि इस इलाके में हाइड्रोकार्बन की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं। अब कंपनी इस खोज का विस्तृत आकलन करेगी और इसके उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ेगी।
क्यों है यह खोज अहम
इस खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे ऑयल इंडिया की विदेशी संपत्तियों की वैल्यू बढ़ेगी। साथ ही, भविष्य में उत्पादन शुरू होने पर कंपनी की आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं। यह कदम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक हालात का असर
इस समय अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में उछाल आया है। ऐसे माहौल में यह खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे क्या होगा
अब इस भंडार की क्षमता का पूरा आकलन किया जाएगा। इसके बाद इसे डेवलपमेंट स्टेज में ले जाकर उत्पादन शुरू करने की योजना बनेगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में यह खोज भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है।