भारत और ओमान के बीच लागू हुआ नया व्यापार समझौता देश की खेती और खाद सुरक्षा के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। 1 जून से लागू हुए इस समझौते के बाद भारत को ओमान से खाद, गैस और दूसरे जरूरी उत्पादों की सप्लाई और मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे समय में यह डील आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कई देशों की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
खाद की सप्लाई होगी सुरक्षित
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। यूरिया और दूसरी खाद के लिए खाड़ी देशों की अहम भूमिका रहती है। ओमान पहले से ही भारत को बड़ी मात्रा में खाद और गैस की सप्लाई करता है। अब ओमान ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत को देने पर भी विचार कर सकता है। इससे खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता काफी हद तक कम हो सकती है।
क्यों अहम है यह डील?
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA के तहत भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात पर शुल्क खत्म हो गया है। इससे भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही ओमान के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए भारत को खाड़ी देशों और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच और आसान होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।
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किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार ने खरीफ 2026 के लिए खाद की जरूरत का दोबारा आकलन किया है और पर्याप्त स्टॉक पहले से तैयार रखा है। अधिकारियों के मुताबिक देश में इस समय जरूरत से ज्यादा खाद का भंडार मौजूद है। इसके अलावा जून और जुलाई में बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और दूसरी खाद भारत पहुंचने वाली है। इससे खेती के मौसम में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
देश की अर्थव्यवस्था को भी होगा लाभ
भारत और ओमान के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार 11 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गया। इस नई डील से भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और ऊर्जा व खाद की सप्लाई भी मजबूत होगी। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं बल्कि भारत की खाद सुरक्षा, कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत मान रहे हैं।