Flex Fuel Vehicles : देश में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सरकार अब एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में गाड़ियों में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।
E20 कार्यक्रम को मिली सफलता
तरुण कपूर ने ‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि E20 कार्यक्रम अब तक सफल साबित हुआ है। कई वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। सरकार का मानना है कि देश में एथेनॉल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और अब E20 की सीमा से आगे बढ़ने का समय आ गया है।
क्यों लिया जा रहा यह फैसला?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और बढ़ती तेल कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में आयातित तेल पर निर्भरता कम करने और घरेलू ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल को अहम विकल्प माना जा रहा है।
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फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन क्या होते हैं?
सामान्य वाहन अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। इससे ज्यादा एथेनॉल होने पर इंजन के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों में विशेष तकनीक होती है, जो ईंधन में एथेनॉल की मात्रा पहचानकर इंजन को उसी हिसाब से संचालित करती है। ऐसे वाहन 20 प्रतिशत से लेकर 85 प्रतिशत या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण पर भी चल सकते हैं।
एथेनॉल उत्पादन में बढ़ी क्षमता
सरकार का कहना है कि चीनी और मक्के से बनने वाले एथेनॉल का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। अब देश की जरूरत से अधिक एथेनॉल उपलब्ध होने लगा है। ऐसे में इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग परिवहन क्षेत्र में किया जा सकता है। फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आलोचनाओं पर सरकार का जवाब
हाल के समय में E20 ईंधन को लेकर कई सवाल उठे थे। इस पर तरुण कपूर ने कहा कि ज्यादातर आलोचनाएं गलत जानकारी पर आधारित थीं। उनके अनुसार विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि E20 ईंधन प्रभावी तरीके से काम करता है। ईंधन दक्षता में होने वाली मामूली कमी की भरपाई इसकी बेहतर गुणवत्ता और उच्च ऑक्टेन क्षमता से हो जाती है। अब सरकार की नजर अगले चरण पर है, जहां एथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती दी जा सके।