पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज क्षेत्र में बनी अस्थिरता के कारण दुनियाभर में ऊर्जा संकट लगातार गहरा रहा है। इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसी बीच भारत ने रूस के एक प्रतिबंधित एलएनजी कार्गो को खरीदने से इनकार करके बड़ा संदेश दिया है। इस फैसले के बाद रूस का गैस टैंकर समुद्र में ही फंस गया है।
समुद्र में फंसा जहाज
रूस के पोरतोवाया एलएनजी प्लांट से निकला कुनपेंग नाम का जहाज गुजरात के दाहेज एलएनजी टर्मिनल की ओर बढ़ रहा था। इस जहाज में करीब 1 लाख 38 हजार 200 घन मीटर गैस भरी हुई थी। लेकिन जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के कारण भारत ने इसका कार्गो लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद यह टैंकर सिंगापुर के पास समुद्र में बिना किसी निश्चित गंतव्य के खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि दस्तावेजों में कार्गो की पहचान बदलने की कोशिश भी हुई थी।
भारत का साफ संदेश
सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूस को स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल वही ईंधन खरीदेगा जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे से बाहर होगा। रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने हाल ही में नई दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से बातचीत भी की थी। इस बैठक में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को लेकर चर्चा हुई लेकिन भारत ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। माना जा रहा है कि रूस इस मुद्दे पर आगे भी भारत से बातचीत जारी रखेगा।
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कच्चे तेल से अलग मामला
भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है लेकिन एलएनजी के मामले में स्थिति अलग बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एलएनजी जहाजों को सैटेलाइट के जरिए आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। ऐसे में उनकी पहचान छुपाना बेहद मुश्किल होता है। दूसरी ओर कच्चे तेल को समुद्र में दूसरे जहाजों में ट्रांसफर करके उसकी असली पहचान छिपाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। यही कारण है कि भारत एलएनजी को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहा है।
रूस की नई रणनीति
रूस लंबे समय के लिए भारत के साथ गैस और उर्वरक आपूर्ति को मजबूत करना चाहता है। रूस की कोशिश है कि भारत के साथ एलएनजी और फर्टिलाइजर व्यापार को बढ़ाया जाए ताकि दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकें। हालांकि प्रतिबंधों और वैश्विक निगरानी के कारण यह रास्ता आसान नहीं दिखाई दे रहा है। रूस के लिए भारत एक बड़ा ऊर्जा बाजार माना जाता है और वह इस साझेदारी को बनाए रखना चाहता है।
भारत की बड़ी चुनौती
भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और उसमें भी करीब 60 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की है ताकि देश में आपूर्ति भी बनी रहे और वैश्विक दबाव भी न बढ़े।