भारत से चावल के निर्यात में बीते साल बड़ी तेजी देखने को मिली है। सरकारी पाबंदियां हटने के बाद चावल का निर्यात 19.4 प्रतिशत बढ़ गया और यह अपने अब तक के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और जैसे ही निर्यात पर रोक हटाई गई, भारतीय चावल वैश्विक बाजार में सस्ता और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि दूसरे देशों की तुलना में भारत से चावल की मांग तेजी से बढ़ी।
सरकार के फैसले का असर
सरकार ने मार्च में चावल के निर्यात पर लगी सभी पाबंदियां हटा दी थीं। इसकी बड़ी वजह देश में रिकॉर्ड उत्पादन और भरपूर भंडार रहा। साल 2022 और 2023 में घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार ने निर्यात पर सख्ती की थी, लेकिन जब उत्पादन मजबूत हुआ तो रोक पूरी तरह हटा दी गई। इसके बाद निर्यातकों को खुली छूट मिली और भारतीय चावल फिर से दुनिया के बाजारों में छा गया।
कीमतें गिरीं, गरीब देशों को राहत
भारत से चावल की सप्लाई बढ़ने का असर एशिया के बाजारों पर भी दिखा। चावल की कीमतें करीब दस साल के निचले स्तर तक पहुंच गईं। इससे अफ्रीका और कई गरीब देशों के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली। जहां पहले महंगे दामों के कारण चावल खरीदना मुश्किल हो रहा था, वहीं अब कम कीमतों पर चावल आसानी से उपलब्ध होने लगा है। भारत का चावल इन देशों की थाली का सहारा बन गया।
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कितना बढ़ा निर्यात
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में भारत का चावल निर्यात बढ़कर 21.55 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। एक साल पहले 2023 में यह आंकड़ा 18.05 मिलियन मीट्रिक टन था। इससे पहले 2022 में भारत ने 22.3 मिलियन मीट्रिक टन चावल निर्यात कर रिकॉर्ड बनाया था। यानी मौजूदा निर्यात फिर से उसी स्तर की ओर बढ़ रहा है।
कौन सा चावल, कहां गया
गैर बासमती चावल का निर्यात सबसे ज्यादा बढ़ा है। साल 2025 में इसका निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 15.15 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह चावल बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों में ज्यादा भेजा गया। वहीं बासमती चावल का निर्यात भी 8 प्रतिशत बढ़कर 6.4 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे देशों ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई।
भारत क्यों आगे निकला
भारत जितना चावल निर्यात करता है, वह थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे बड़े निर्यातक देशों के कुल निर्यात से भी ज्यादा है। कम कीमत और भरपूर सप्लाई के कारण भारतीय चावल ने अपना खोया हुआ बाजार फिर से हासिल कर लिया है। यही वजह है कि आज भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बना हुआ है, बल्कि गरीब देशों की खाद्य सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।