India Russia Energy Deal : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच रूस ने भारत को ऊर्जा और उर्वरकों की सप्लाई को लेकर बड़ा भरोसा दिया है। रूस का कहना है कि मुश्किल अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद भारत को जरूरी ऊर्जा और खाद की आपूर्ति में रुकावट नहीं आने दी जाएगी। मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा।
पुतिन से मिले जयशंकर, बढ़ा सहयोग
जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु, विज्ञान और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस दौरान पुतिन ने भारतीय कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई बढ़ाने की बात कही।
पांच साल में चार गुना बढ़ा कारोबार
भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। जयशंकर के मुताबिक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में करीब 13 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर हो गया। यानी पांच साल के भीतर व्यापार करीब चार गुना बढ़ा है। हालांकि, इसी दौरान व्यापार असंतुलन भी तेजी से बढ़ा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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50 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ असंतुलन
जयशंकर ने भारत-रूस व्यापार में बढ़ते असंतुलन को बड़ी प्राथमिकता बताया। उनके मुताबिक व्यापार घाटे का अंतर करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। भारत अब बाजार तक पहुंच बढ़ाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने और भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दे रहा है। दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है।
ऊर्जा और खाद की सप्लाई रहेगी जारी
रूस की ओर से ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन भारत के लिए खास मायने रखता है। भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए ऊर्जा और खाद दोनों महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका के बीच रूस का यह भरोसा नई दिल्ली के लिए अहम माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी की मजबूती भी सामने आती है।
2030 तक कारोबार का लक्ष्य बड़ा
भारत और रूस अब केवल मौजूदा व्यापार को बनाए रखने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि इसे और विस्तार देने की तैयारी कर रहे हैं। जयशंकर ने कारोबारियों के बीच जुड़ाव, निवेश और नई तकनीकी संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में आगे भी ऊर्जा, उर्वरक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों की भूमिका अहम रह सकती है।