India-Russia Relations: रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मेंटुरोव का हालिया भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। दो दिवसीय इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देना रहा। इस दौरान मेंटुरोव ने भारत के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
आर्थिक और व्यापारिक सहयोग
इस दौरे के दौरान व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। नरेंद्र मोदी और निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठकों में दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को विस्तारित करने पर चर्चा की। खासतौर पर उद्योग, ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की गई। यह कदम वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीतिक और वैश्विक मुद्दे
मेंटुरोव ने अजित डोभाल और एस. जयशंकर के साथ भी व्यापक चर्चा की। इसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके वैश्विक प्रभाव जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे उनकी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होती नजर आती है।
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तकनीक और नए क्षेत्र
इस यात्रा की एक खास बात यह रही कि पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे नए सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत-रूस IRIGC-TEC के सह-अध्यक्ष के रूप में मेंटुरोव ने इन क्षेत्रों में संयुक्त पहल को बढ़ावा देने की बात कही। इससे दोनों देशों के बीच भविष्य उन्मुख सहयोग की संभावनाएं और बढ़ गई हैं।
भविष्य की साझेदारी की दिशा
यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत-रूस संबंधों के अगले चरण की रूपरेखा तय करने वाला साबित हुआ। व्लादिमीर पुतिन के निर्देशों के तहत व्यापार बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक अस्थिरता के बीच दोनों देशों ने अपने रिश्तों को अधिक व्यावहारिक, बहुआयामी और दीर्घकालिक बनाने का संकेत दिया है।