India SAF Conclave : भारत को Sustainable Aviation Fuel यानी SAF का वैश्विक और दक्षिण एशियाई केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में दूसरा India SAF Conclave-2026 आयोजित होगा। इसमें 25 से ज्यादा देशों के 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों और 100 से ज्यादा वैश्विक विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत SAF के इस्तेमाल और उत्पादन को अगले चरण तक ले जाने की तैयारी कर रहा है।
SAF से बदल सकता है विमानन का भविष्य
SAF को विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के अहम विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। SAF Association के अनुसार, भारत 2050 तक करीब 4 करोड़ टन SAF सालाना उत्पादन करने की क्षमता विकसित कर सकता है। यह वैश्विक उत्पादन क्षमता का लगभग 10 फीसदी हो सकता है। इसके इस्तेमाल से विमानन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में काफी कमी लाने की संभावना है। हालांकि SAF की लागत और बड़े पैमाने पर उपलब्धता अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निवेश से लेकर नई तकनीक तक पर होगी चर्चा
India SAF Conclave में टिकाऊ कच्चे माल, SAF तकनीक, मानक और प्रमाणन, परियोजना वित्तपोषण, सप्लाई चेन और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ तकनीकी क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा निवेशकों और खरीदारों के लिए मंच, मंत्रिस्तरीय सत्र, तकनीकी सम्मेलन, नेतृत्व स्तर की बैठकें और कारोबारी मुलाकातें भी आयोजित की जाएंगी।
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क्या केवल SAF का लक्ष्य काफी होगा?
SAF Association और CMAI के महासचिव रोहित कुमार के मुताबिक, भारत के पास वैश्विक SAF हब बनने का बड़ा अवसर है, लेकिन केवल अनिवार्य मिश्रण का लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मजबूत इकोसिस्टम, निवेश, तकनीक और परियोजनाओं की जरूरत होगी। सम्मेलन का मकसद इन्हीं क्षेत्रों के वैश्विक हितधारकों को एक मंच पर लाकर भारत की SAF महत्वाकांक्षा को वास्तविक उत्पादन और निवेश में बदलना है।
सस्ती उड़ान से पहले लागत घटाने की चुनौती
SAF के विस्तार से विमानन के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसका सीधा फायदा यात्रियों को सस्ती टिकट के रूप में कब मिलेगा, यह अभी तय नहीं है। ईंधन की कीमत, उत्पादन क्षमता, तकनीक और सप्लाई चेन जैसे कई कारक विमान किराये को प्रभावित करेंगे। सम्मेलन में सरकारी संस्थानों और कंपनियों के बीच संभावित समझौते भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में दिल्ली का यह आयोजन भारत के SAF मिशन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।