SpiceJet NCLT Fine : कर्ज और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही SpiceJet को NCLT में चल रहे एक मामले में बड़ा झटका लगा है। एयरलाइन और विमान लीज पर देने वाली कंपनी Aviator ML 29641 Limited के बीच भुगतान को लेकर विवाद चल रहा था। मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल तक पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई होती रही। खास बात यह रही कि ट्रिब्यूनल की ओर से कई बार दोनों पक्षों से पूछा गया कि क्या आपसी समझौते की कोई संभावना है।
फैसला सुनाने से ठीक पहले सेटलमेंट
मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद NCLT ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। लेकिन जिस दिन फैसला सुनाया जाना था, उसी दिन दोनों कंपनियों ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उनके बीच समझौता हो गया है। SpiceJet ने बताया कि उसने Aviator ML के साथ विवाद सुलझा लिया है और समझौते के तहत 5 लाख डॉलर का शुरुआती भुगतान भी किया जा चुका है। इसी घटनाक्रम से ट्रिब्यूनल नाराज हो गया।
दोनों कंपनियों पर 15-15 लाख का जुर्माना
NCLT की स्पेशल बेंच ने SpiceJet और Aviator ML 29641 Limited दोनों पर 15-15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बेंच की नाराजगी की वजह यह थी कि समझौते की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, मामले की सुनवाई और आदेश तैयार करने में न्यायिक समय खर्च हुआ और सेटलमेंट की जानकारी फैसला सुनाए जाने के दिन दी गई। बेंच ने इस रवैये को उचित नहीं माना।
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NCLT की सख्त टिप्पणी
ट्रिब्यूनल ने कहा कि न्यायिक समय बेहद कीमती है और उसे इस तरह बर्बाद नहीं किया जा सकता। NCLT ने यह भी बताया कि SpiceJet के खिलाफ इनसॉल्वेंसी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष बेंच बनाई गई थी और इसके लिए न्यायिक समय अलग रखा गया था। बेंच का कहना था कि उसने एयरलाइन के मामलों को सुनने के लिए दूसरे कामों को पीछे रखा था। ऐसे में आखिरी वक्त पर सेटलमेंट की जानकारी देना गंभीर विषय माना गया।
एक क्रेडिटर से समझौता
Aviator ML के साथ विवाद सुलझने के बावजूद SpiceJet के सामने संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अन्य क्रेडिटर्स की ओर से दलील दी गई कि एक कंपनी के साथ सेटलमेंट होने से बाकी सात इनसॉल्वेंसी याचिकाओं की सुनवाई नहीं रोकी जानी चाहिए। एयरलाइन की वित्तीय स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। अप्रैल-दिसंबर FY26 में कंपनी ने 1,138.15 करोड़ रुपये का नेट लॉस दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में नुकसान 266.8 करोड़ रुपये था। इसी दौरान ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 14 फीसदी घटकर 3,271.5 करोड़ रुपये रहा।