अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ ने भारत के निर्यात पर सीधा असर डाला है। अमेरिका लंबे समय से भारतीय सामानों का बड़ा बाजार रहा है, लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद वहां भारत का एक्सपोर्ट कमजोर पड़ा है। इससे कई सेक्टर प्रभावित हुए और भारतीय कंपनियों को नए विकल्प तलाशने पड़े। इसी दबाव ने भारत को अपनी ट्रेड रणनीति दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।
भारत ने बदली एक्सपोर्ट रणनीति
अमेरिका में आई गिरावट के बाद भारत ने तेजी से दूसरे देशों की ओर रुख किया। संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, सिंगापुर, नीदरलैंड्स और यूरोपीय यूनियन के कई देशों में भारत ने अपना निर्यात बढ़ाया। इसी कड़ी में अब एक नाम तेजी से उभर रहा है और वह है चीन। कभी ट्रेड घाटे को लेकर चर्चा में रहने वाला चीन अब भारत के लिए बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बनता दिख रहा है।
चीन को निर्यात में जबरदस्त उछाल
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच चीन के लिए भारत का निर्यात 33 प्रतिशत बढ़कर 12.22 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह न सिर्फ पिछले साल के मुकाबले बड़ी छलांग है, बल्कि बीते चार सालों में सबसे ऊंचा स्तर भी है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार में एक संरचनात्मक बदलाव हो रहा है।
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पहले के आंकड़ों से कितना आगे निकला भारत
अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो यह बढ़ोतरी और साफ दिखती है। अप्रैल-नवंबर 2024-25 में भारत ने चीन को करीब 9.2 बिलियन डॉलर का सामान भेजा था। इससे पहले 2022-23 में यह आंकड़ा 9.89 बिलियन डॉलर और 2023-24 में 10.28 बिलियन डॉलर रहा था। अब 12.22 बिलियन डॉलर का स्तर पार करना बताता है कि भारत ने गिरावट से उबरकर नई रफ्तार पकड़ ली है।
किस सामान ने दिलाई बढ़त
चीन को भेजे जा रहे भारतीय सामानों की सूची काफी बड़ी है। इसमें हरी मूंग, सूखी मिर्च और तेल-खली जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा ब्लैक टाइगर प्रॉन और वन्नामेई झींगा जैसे सी-फूड आइटम्स की भी अच्छी मांग है। ये ऐसे सेक्टर हैं जहां भारत की पकड़ पहले से मजबूत रही है और अब इसका फायदा दिख रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मेटल सेक्टर का रोल
सिर्फ कृषि ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और धातु सेक्टर ने भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का निर्यात कुछ महीनों में ही 23.9 मिलियन डॉलर से बढ़कर 922.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। साथ ही फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल, टेलीफोनी उपकरण, एल्युमिनियम और रिफाइंड कॉपर बिलेट्स की सप्लाई भी तेजी से बढ़ी है। इससे साफ है कि भारत का निर्यात अब ज्यादा व्यापक और संतुलित हो रहा है।